पूर्व मंत्रियों सहित कई दिग्गज गिरे औंधे मुंह
फरीदाबाद ! नगर निगम चुनावों में राज्य के कई पूर्व मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। इनमें से एकाध को छोडक़र बाकि पूर्व मंत्रियों को पराजय का मुंह देखना पड़ा है।;
फरीदाबाद ! नगर निगम चुनावों में राज्य के कई पूर्व मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। इनमें से एकाध को छोडक़र बाकि पूर्व मंत्रियों को पराजय का मुंह देखना पड़ा है। इससे इनकी खासी किरकिरी हुई है। लोगों में यह बात चर्चा का विषय बनी हुई है। बड़खल विधानसभा क्षेत्र में सीधा मुकाबला पूर्व मंत्री महेंद्र प्रताप, पूर्वमंत्री एसी चौधरी व मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा के बीच में था। मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा जहां बड़खल क्षेत्र से अपने 5 प्रत्याशियों को जिताने में सफल रही हैं।
वहीं पूर्व मंत्री महेंद्र प्रताप के मंझले पुत्र विजय प्रताप अपने पिता की राजनैतिक प्रतिष्ठा को बचाने में कामयाब रहे हैं। विजय प्रताप ने बड़खल विधानसभा क्षेत्र में पांच प्रत्याशियों को अपने समर्थन से चुनाव मैदान में उतारा था। उनमें से वह कड़ी मेहनत के बाद 3 प्रत्याशियों को जिताकर लाए हैं। विशेष तौर पर वार्ड नंबर 16 की सीट को लेकर महेंद्र प्रताप परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। अथक मेहनत के बाद विजय प्रताप इस सीट पर मोर्चा संभालकर अपने चचेरे भाई राकेश भड़ाना को जिताकर लाए हैं। पूर्व मंत्री महेंद्र प्रताप एवं सीमा त्रिखा में इस सीट को लेकर खासा तनाव बना हुआ था। पूर्व मंत्री ने इस सीट से जहां अपने भतीजे राकेश भड़ाना को उतारा था, वहीं सीमा त्रिखा ने पूर्व विधायक स्व. पुरुषभान के भतीजे सुनील कुमार टंैपू को भाजपा का उम्मीदवार बनाया था। सीमा त्रिखा ने इस सीट पर दिन रात की मेहनत की थी। कांटे की टक्कर के बाद पूर्व मंत्री महेंद्र प्रताप ने अपने मंझले पुत्र की राजनीतिक समझबूझ से अपने परिवार की निजी सीट को जीत लिया। राकेश भड़ाना ने यहां से 55 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। जबकि सीमा त्रिखा की अथक मेहनत से टैंपू को भी अच्छी खासी वोटें मिल पाई हैं। हालांकि सीमा त्रिखा इसका कारण ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा का कमजोर होना मान रहीं है। इसी प्रकार से वार्ड नंबर 18 से विजय प्रताप ने रतनलाल का समर्थन कर उसे चुनाव मैदान में उतारा था। जबकि भाजपा इस सीट को जीतकर भी हार गई। सीमा त्रिखा ने पहले इस सीट से मुंशीराम को उतारा था। मगर बाद में उसकी टिकट काटकर नवीन कुमार को भाजपा ने अपना प्रत्याशी चुन लिया। इससे मुंशीराम के समर्थकों में इतनी नाराजगी हुई कि उन्होंने भाजपा के खिलाफ चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया। मुंशीराम के चुनाव में कूदते ही भाजपा को बड़ा नुक्सान झेलना पड़ा। इसका सीधा सा लाभ विजय प्रताप के उम्मीदवार को मिल गया। वह चुनाव जीतने में सफल रहा। वार्ड नंबर 21 में भी विजय प्रताप के उम्मीदवार जितेंद्र भड़ाना ने जोरदार तरीके से सफलता हासिल कर ली। इस तरह से विपक्ष में रहते हुए भी विजय प्रताप ने अपने परिवार की राजनैतिक प्रतिष्ठा को बचाने में कामयाबी पा ली।