भोपाल: मध्य प्रदेश कैडर की 2011 बैच की IAS अधिकारी नेहा मारव्या सिंह एक बार फिर अपने तबादले को लेकर सुर्खियों में हैं। पिछले करीब एक साल में चौथी बार ट्रांसफर किए जाने के बाद उन्होंने नाराजगी जताई है। एक संदेश के जरिए उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ विद्रोह जैसा माहौल तैयार किया गया और इसके बाद उनका तबादला कर दिया गया। उन्होंने पूरे मामले में IAS एसोसिएशन से हस्तक्षेप की मांग की है। नेहा मारव्या का प्रशासनिक करियर लंबे समय से तबादलों के कारण चर्चा में रहा है। करीब 15 वर्षों की सेवा में उनका 11 बार स्थानांतरण हो चुका है। ताजा आदेश में उन्हें मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम का प्रबंध संचालक नियुक्त किया गया है।
पिछले एक साल में चौथी बार बदली जिम्मेदारी
नेहा मारव्या को हाल ही में नई जिम्मेदारी दी गई है। खास बात यह है कि पिछली पोस्टिंग के करीब 50 दिन बाद ही उन्हें दूसरी जिम्मेदारी सौंप दी गई। लगातार कम अवधि में पोस्टिंग बदलने को लेकर उन्होंने सवाल उठाए हैं। अपने संदेश में उन्होंने संकेत दिया कि उनके खिलाफ ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे उनके लिए काम करना मुश्किल हो गया। उन्होंने इस मामले को लेकर IAS एसोसिएशन से हस्तक्षेप करने की अपील की है। हालांकि, तबादले को लेकर सरकार की ओर से किसी तरह की आधिकारिक वजह सामने आने की जानकारी नहीं है।
कौन हैं नेहा मारव्या सिंह?
नेहा मारव्या सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं। उन्होंने मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNNIT), इलाहाबाद से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा की तैयारी की और भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित हुईं। 2011 बैच की अधिकारी के तौर पर उनका मध्य प्रदेश कैडर आवंटित हुआ। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने राज्य के अलग-अलग विभागों और पदों पर जिम्मेदारियां संभाली हैं।
डिंडौरी कलेक्टर बनने के बाद बढ़ी चर्चा
नेहा मारव्या को वर्ष 2025 में पहली बार जिला कलेक्टर के तौर पर फील्ड पोस्टिंग मिली थी। उन्हें डिंडौरी का कलेक्टर बनाया गया। हालांकि, वह इस पद पर एक साल पूरा नहीं कर सकीं और करीब आठ महीने बाद उनका तबादला कर दिया गया। डिंडौरी में कार्यकाल के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कथित मतभेद को लेकर भी वह चर्चा में रहीं। हालांकि, इन मतभेदों को लेकर सामने आई खबरों पर अलग-अलग दावे किए गए हैं।
विभाग में भी विवाद की खबरें
डिंडौरी से हटाए जाने के बाद नेहा मारव्या को आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी। इस दौरान उनके काम करने के तरीके को लेकर विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के असंतोष की खबरें सामने आईं। बताया गया कि मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक भी पहुंचा। इसके बाद उनकी जिम्मेदारी में फिर बदलाव किया गया। अब ताजा तबादले के बाद उन्होंने लगातार स्थानांतरण को लेकर अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखी है।
15 साल में 11 बार तबादला
नेहा मारव्या के मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उनके ट्रांसफर रिकॉर्ड को लेकर हो रही है। करीब 15 वर्ष के प्रशासनिक करियर में 11 बार तबादला होना उनकी पोस्टिंग को लेकर सवाल खड़े करता रहा है। खासकर हाल के एक वर्ष में कई बार जिम्मेदारी बदलने से यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। फिलहाल उनकी नई जिम्मेदारी मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध संचालक के तौर पर तय की गई है। अब निगाह इस बात पर है कि नई पोस्टिंग में उनका कार्यकाल कितना लंबा रहता है और IAS एसोसिएशन उनकी शिकायत पर क्या रुख अपनाता है।