‘ऊंची जातियों की सेवा करें शूद्र’… IIT मंडी में लगे पोस्टर से विवाद, जांच समिति गठित

मामला IIT मंडी के नॉर्थ कैंपस स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित जन्माष्टमी समारोह से जुड़ा है। छात्रों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम के लिए परिसर में कई पोस्टर लगाए गए थे। इनमें से एक पोस्टर का शीर्षक ‘श्रीमद्भगवद्गीता- द टाइमलेस विजडम’ था।;

Update: 2026-09-07 10:28 GMT

मंडी: हिमाचल प्रदेश के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी में जन्माष्टमी समारोह के दौरान लगाए गए एक पोस्टर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पोस्टर में भगवद्गीता के संदर्भ में समाज के चार वर्णों का उल्लेख किया गया था। इसमें शूद्रों की भूमिका को ‘उच्च वर्गों की सेवा’ से जोड़ने वाली टिप्पणी लिखे जाने के बाद संस्थान में विरोध और चर्चा शुरू हो गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए IIT मंडी प्रशासन ने जांच समिति का गठन किया है।

जन्माष्टमी कार्यक्रम में लगाया गया था पोस्टर

मामला IIT मंडी के नॉर्थ कैंपस स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित जन्माष्टमी समारोह से जुड़ा है। छात्रों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम के लिए परिसर में कई पोस्टर लगाए गए थे। इनमें से एक पोस्टर का शीर्षक ‘श्रीमद्भगवद्गीता- द टाइमलेस विजडम’ था। पोस्टर में हिंदू धर्मग्रंथ भगवद्गीता के संदर्भ में समाज को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चार श्रेणियों में बांटकर उनके कार्य बताए गए थे। इसमें ब्राह्मणों की भूमिका भगवान के संदेश का प्रसार करने, क्षत्रियों की समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करने तथा वैश्यों की जिम्मेदारी अर्थव्यवस्था चलाने के रूप में बताई गई। वहीं, शूद्रों के कार्य को उच्च वर्गों की सेवा करने से जोड़ने वाली बात लिखी गई थी। पोस्टर पर भगवद्गीता का एक श्लोक भी प्रदर्शित किया गया था, जिसमें चार वर्णों की व्यवस्था को गुण और कर्म के आधार पर बताए जाने का उल्लेख है। हालांकि, पोस्टर में की गई व्याख्या को लेकर विवाद पैदा हो गया।

संस्थान ने पोस्टर की व्याख्या से बनाई दूरी

विवाद बढ़ने के बाद IIT मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने संस्थान के पूरे समुदाय को ईमेल भेजकर मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संस्थान जातिगत भेदभाव या इस तरह के किसी विचार का समर्थन नहीं करता। निदेशक ने कहा कि पोस्टर में भगवद्गीता के संदेश की जो व्याख्या की गई, वह कुछ छात्रों की ओर से की गई व्याख्या है। यह संस्थान की आधिकारिक सोच या नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जन्माष्टमी का कार्यक्रम छात्रों की ओर से आयोजित किया गया था।

SC, ST और OBC प्रतिनिधियों वाली समिति करेगी जांच

IIT मंडी प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक समिति गठित की है। इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से जुड़े प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। समिति का उद्देश्य पोस्टर तैयार करने और उसे परिसर में प्रदर्शित करने वाले छात्रों की पहचान करना तथा पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच करना है। इसके लिए परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा सकती है। जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट संस्थान प्रशासन को सौंपेगी।

‘जातिगत भेदभाव का हमेशा विरोध किया’

प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से भी विभिन्न मंचों पर जातिगत भेदभाव का विरोध किया है। उन्होंने संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि IIT मंडी संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अपने इस्कॉन से जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्कॉन भी जातिगत भेदभाव के खिलाफ है। उनके अनुसार, वहां विभिन्न सामाजिक और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि से आने वाले लोग धार्मिक सेवाओं में हिस्सा लेते हैं।

रिपोर्ट के बाद पुलिस तक पहुंच सकता है मामला

जांच समिति पोस्टर से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पड़ताल करेगी। यदि जांच के दौरान ऐसा कोई पहलू सामने आता है जिसके लिए कानूनी कार्रवाई जरूरी हो, तो समिति की रिपोर्ट के आधार पर मामला पुलिस को सौंपे जाने की संभावना भी है। फिलहाल संस्थान का जोर मामले की निष्पक्ष जांच और वास्तविक तथ्यों को सामने लाने पर है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह के जातिगत भेदभाव को संस्थान में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पहले भी विवादों में रहा है IIT मंडी

IIT मंडी के छात्रों से जुड़ा यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले भी कुछ वर्ष पूर्व महाभारत के मंचन को लेकर संस्थान के छात्रों से संबंधित विवाद सामने आया था। ऐसे में ताजा पोस्टर विवाद ने एक बार फिर परिसर में धार्मिक और सामाजिक विषयों से जुड़े आयोजनों की प्रकृति तथा उनकी प्रस्तुति को लेकर बहस छेड़ दी है।

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