केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताई ‘दिमागी नक्सल’ परिभाषा, बोले- विपक्षी नेता नहीं
पीएम मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष बताया। जानिए सरकार किन विचारों और गतिविधियों के समर्थन को इस शब्द से जोड़ रही है।;
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों की आलोचना के बीच अब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष सामने रखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था।
रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार उन लोगों को ‘दिमागी नक्सल’ मानती है, जो कुछ ऐसी विचारधाराओं और गतिविधियों का समर्थन करते हैं, जिन्हें सरकार देश की एकता और संवैधानिक व्यवस्था के लिए चुनौती मानती है।
रिजिजू ने बताए ‘दिमागी नक्सल’ के तीन आधार
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, ऐसे लोगों में वे लोग शामिल हैं जो माओवाद का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को नहीं मानते। इसके अलावा अलगाववादियों के समर्थन और जम्मू-कश्मीर से जुड़े पुराने संवैधानिक प्रावधानों के समर्थन को भी उन्होंने इस संदर्भ में गिनाया।
रिजिजू ने तीसरे बिंदु में उन लोगों का उल्लेख किया जो ‘चिकन नेक’ क्षेत्र को अलग करके पूर्वोत्तर राज्यों को भारत से अलग करने की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे विचारों का समर्थन करने वालों को ‘दिमागी नक्सल’ मानती है।
पीएम मोदी ने लाल किले से क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए लोगों को ‘दिमागी नक्सल’ विचारधारा से सतर्क रहने की अपील की थी।
पीएम मोदी ने कहा था कि देश ने हथियारबंद नक्सली हिंसा के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन कुछ वैचारिक समर्थक अब भी हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने के अवसर तलाशते हैं। उन्होंने ऐसे तत्वों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत पर जोर दिया था।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
पीएम मोदी की टिप्पणी के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पहले विपक्षी और असहमति रखने वाले लोगों को ‘अर्बन नक्सल’ कहा जाता था और अब ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर सवाल उठाए। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व है।
इस पूरे विवाद के बीच सरकार और विपक्ष के बीच ‘दिमागी नक्सल’ शब्द की व्याख्या को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।