वाराणसी में भाजपा को दोहरा झटका, केदारनाथ सिंह ने मानी हार, एमएलसी स्नातक सीट पर सपा की बढ़त
वाराणसी खंड स्नातक MLC सीट पर सपा के आशुतोष सिन्हा ने 16,984 वोटों की बढ़त बनाई। भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने जनादेश स्वीकार करते हुए मतदाताओं का आभार जताया।;
इससे पहले वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर भी सपा के लाल बिहारी यादव ने जीत हासिल की थी। ऐसे में स्नातक सीट पर भी सपा की मजबूत स्थिति को भाजपा के लिए एक और राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
केदारनाथ सिंह ने स्वीकार किया जनादेश
भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा कर मतदाताओं के फैसले को लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ स्वीकार करने की बात कही। उन्होंने अपने समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं का धन्यवाद किया। केदारनाथ सिंह के मुताबिक, चुनाव में सफलता या असफलता लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और जनसेवा का संकल्प किसी एक चुनाव के परिणाम पर निर्भर नहीं करता।
उन्होंने कहा कि मतदाताओं से मिला स्नेह और विश्वास उनके लिए अमूल्य है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह आगे भी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के बीच बने रहेंगे और उनकी समस्याओं तथा आकांक्षाओं के लिए काम करते रहेंगे।
आशुतोष सिन्हा को 16,984 वोटों की बढ़त
29 अक्टूबर की सुबह तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, प्रथम वरीयता के मतों की नौवें चक्र तक की गिनती में सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा को 50,462 वोट मिले थे। इसके मुकाबले भाजपा के केदारनाथ सिंह को 33,478 मत प्राप्त हुए। इस तरह आशुतोष सिन्हा 16,984 मतों से आगे चल रहे थे।
आठवें चक्र तक सपा प्रत्याशी की बढ़त 16,261 मतों की थी, जो अगले चक्र में और बढ़ गई। हालांकि, प्रथम वरीयता के मतों की गिनती पूरी होने के बावजूद जीत के लिए जरूरी निर्धारित कोटा हासिल होने की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई थी।
विवादों के कारण मतगणना में देरी
वाराणसी खंड स्नातक सीट पर मतगणना 27 अक्टूबर से जारी थी। पांचवें चक्र की गिनती के दौरान भाजपा पक्ष ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दोबारा मतगणना की मांग की थी। भाजपा की ओर से एजेंट की अनुपस्थिति को लेकर भी आपत्ति जताए जाने की खबरें सामने आईं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
दूसरी वरीयता के मतों से तय होगा नतीजा
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव परिणाम तय करने की प्रक्रिया सामान्य मतगणना से अलग होती है। यदि प्रथम वरीयता के मतों से कोई उम्मीदवार निर्धारित कोटा हासिल नहीं कर पाता, तो नियमों के अनुसार अगली वरीयता के मतों की गणना की जाती है।
ऐसे में आशुतोष सिन्हा की बढ़त ने सपा समर्थकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। लेकिन अंतिम जीत की पुष्टि आधिकारिक परिणाम और निर्वाचन अधिकारी की घोषणा के बाद ही होगी।