रेप केस में समझौते से नहीं खत्म होगा मुकदमा, सुप्रीम कोर्ट ने बताए 2 बड़े खतरे; हाई कोर्ट का फैसला पलटा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेप जैसे गंभीर अपराधों में समझौते के आधार पर केस खत्म नहीं किया जा सकता। जानिए अदालत ने समझौते के पीछे कौन से दो बड़े खतरे बताए।;
नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में समझौते के आधार पर मुकदमा खत्म करने को लेकर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के आधार पर रेप और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले को समाप्त कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर अपराधों को केवल आपसी सुलह के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता। अदालत ने आरोपी को शर्तों के साथ अग्रिम जमानत देते हुए मामले में सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया।
समझौते के पीछे छिपे दो बड़े खतरे
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि दुष्कर्म, हत्या और डकैती जैसे गंभीर अपराध केवल दो पक्षों के बीच का निजी विवाद नहीं होते। ऐसे मामलों में अपराध की प्रकृति और समाज पर उसके प्रभाव को ध्यान में रखना जरूरी है।
अदालत ने समझौते के आधार पर मुकदमा खत्म करने के पीछे दो प्रमुख आशंकाएं जताईं। पहली, आरोपी पीड़िता पर दबाव डालकर या डराकर समझौता करने के लिए मजबूर कर सकता है। दूसरी, कुछ मामलों में आर्थिक लाभ के लालच में झूठी शिकायत दर्ज कराए जाने की आशंका भी हो सकती है।
पीठ ने संकेत दिया कि न्यायिक प्रक्रिया में इन दोनों संभावनाओं को गंभीरता से देखना जरूरी है। केवल समझौता हो जाने से मामले की सच्चाई और अपराध की गंभीरता की जांच की आवश्यकता समाप्त नहीं हो जाती।
पीड़िता ने कहा- समझौते के लिए बनाया गया दबाव
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता से भी बातचीत की। पीड़िता ने कथित तौर पर बताया कि उस पर समझौता करने के लिए दबाव बनाया गया था। उसने यह भी कहा कि वह समझौते के लिए तैयार नहीं है और उसकी शिकायत सही है, हालांकि उसे पैसों की जरूरत है।
पीड़िता के बयान के बाद मामले में समझौते की परिस्थितियों को लेकर सवाल और महत्वपूर्ण हो गए। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष की स्थिति और सहमति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट का आदेश रद्द, ट्रायल जारी रहेगा
मामले में आरोपी ने रेप और एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज केस में अग्रिम जमानत मांगी थी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पक्षों के बीच समझौते के आधार पर अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मुकदमा खत्म कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को रद्द करते हुए ट्रायल आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। साथ ही आरोपी को निर्धारित शर्तों के साथ अग्रिम जमानत प्रदान की। अदालत की टिप्पणी का संदेश स्पष्ट है कि गंभीर आपराधिक मामलों में समझौता अपने आप मुकदमा खत्म करने का आधार नहीं बन सकता।