नेशनल कॉन्फ्रेंस में बढ़ी बगावत, सांसद आगा रुहुल्ला देंगे इस्तीफा; उमर अब्दुल्ला से क्यों नाराज हैं?

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष की खबरें सामने आई हैं। पार्टी के कुछ विधायकों की नाराजगी को लेकर पूछे गए सवाल पर रुहुल्ला ने कहा कि मौजूदा हालात अप्रत्याशित नहीं हैं।;

Update: 2026-10-29 05:44 GMT

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के भीतर जारी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी में बढ़ी नाराजगी के बीच सांसद आगा सैयद रुहुल्ला ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाने का एलान किया है। उन्होंने तीन नवंबर को पार्टी और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की है। रुहुल्ला लंबे समय से पार्टी नेतृत्व के कामकाज और उसके राजनीतिक रुख पर सवाल उठाते रहे हैं। उनके इस फैसले से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। खास बात यह है कि रुहुल्ला ने साफ कर दिया है कि उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और वह अपने फैसले पर कायम हैं।

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बढ़ी नाराजगी

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष की खबरें सामने आई हैं। पार्टी के कुछ विधायकों की नाराजगी को लेकर पूछे गए सवाल पर रुहुल्ला ने कहा कि मौजूदा हालात अप्रत्याशित नहीं हैं। उनके मुताबिक, वह पहले से ही पार्टी के भीतर कुछ लोगों की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हैं, लेकिन उस समय उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। रुहुल्ला ने कहा कि पहले वह अकेले यह मुद्दा उठा रहे थे, लेकिन अब पार्टी के अन्य विधायक भी इसी तरह की बातें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के मौजूदा हालात में जो नाराजगी दिखाई दे रही है, वह स्वाभाविक है। हालांकि, रुहुल्ला ने किसी भी नाराज विधायक के साथ संपर्क में होने से इनकार किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य पार्टी में फूट डालना नहीं है। उनके मुताबिक, पार्टी के भीतर चल रहे घटनाक्रम और उनके अपने राजनीतिक फैसले को अलग-अलग संदर्भों में देखा जाना चाहिए।

तीन नवंबर को देंगे इस्तीफा, पिता की बरसी भी इसी दिन

आगा सैयद रुहुल्ला ने तीन नवंबर को इस्तीफा देने की तारीख तय की है। यह तारीख उनके परिवार के लिए भी भावनात्मक महत्व रखती है। इसी दिन उनके पिता की बरसी है, जिनकी वर्ष 2000 में एक आतंकी हमले में मौत हो गई थी। रुहुल्ला के इस एलान ने जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। उनके इस्तीफे से नेशनल कॉन्फ्रेंस को राजनीतिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि वह पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। इसके अलावा, वह जम्मू-कश्मीर के शिया समुदाय के एक बड़े वर्ग में धार्मिक और सामाजिक प्रभाव भी रखते हैं।

घोषणापत्र के वादों से पीछे हटने का लगाया आरोप

रुहुल्ला की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह नेशनल कॉन्फ्रेंस की राजनीतिक दिशा और चुनावी वादों को लेकर बताई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर का विशेष संवैधानिक दर्जा बहाल करने और राज्य का दर्जा वापस दिलाने के लिए प्रयास करने का वादा किया था, लेकिन अब वह अपने वादों से पीछे हटती दिखाई दे रही है। रुहुल्ला ने कहा कि वह खुद घोषणापत्र तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल थे। ऐसे में उन्हें लगता है कि पार्टी को अपने मूल राजनीतिक एजेंडे पर कायम रहना चाहिए था। उनके मुताबिक, आरक्षण व्यवस्था को युक्तिसंगत बनाने के मुद्दे को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी के मूल सिद्धांतों और राजनीतिक एजेंडे की बात उठाई, लेकिन उनकी बात कई लोगों को पसंद नहीं आई। रुहुल्ला का आरोप है कि इसी वजह से उन्हें पार्टी में दरकिनार करने की कोशिश की गई। उनके इन बयानों से स्पष्ट है कि विवाद केवल मंत्रिमंडल विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी की नीतियों, चुनावी वादों और नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर भी मतभेद गहरे हुए हैं।

फारूक अब्दुल्ला ने दी थी दोबारा चुनाव लड़ने की चुनौती

रुहुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के बीच मतभेद पहले भी सार्वजनिक हो चुके हैं। इसी वर्ष 26 अगस्त को फारूक अब्दुल्ला ने रुहुल्ला के बागी तेवरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव और स्पष्ट हो गया। रुहुल्ला ने फारूक अब्दुल्ला की चुनौती स्वीकार करते हुए तीन नवंबर को इस्तीफा देने की बात कही थी। अब उन्होंने अपने फैसले को दोहराकर संकेत दिया है कि पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद दूर नहीं हुए हैं।

बडगाम उपचुनाव में प्रचार से बनाई थी दूरी

नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ रुहुल्ला की दूरी हाल के चुनावी घटनाक्रम में भी दिखाई दी थी। बडगाम विधानसभा उपचुनाव में वह पार्टी उम्मीदवार आगा सैयद महमूद के प्रचार अभियान से दूर रहे थे। इस चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस को पीडीपी उम्मीदवार आगा सैयद मुंतजिर के हाथों हार का सामना करना पड़ा। रुहुल्ला की प्रचार से दूरी को पार्टी के भीतर मतभेदों के संदर्भ में देखा गया। हालांकि, उपचुनाव में हार के पीछे कई कारक हो सकते हैं, लेकिन इस घटनाक्रम ने पार्टी के अंदरूनी समीकरणों पर चर्चा को और तेज कर दिया।

क्या नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए बढ़ेंगी मुश्किलें?

आगा सैयद रुहुल्ला का इस्तीफा नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए केवल एक सांसद के अलग होने का मामला नहीं है। इससे पार्टी के भीतर असंतोष, नेतृत्व के प्रति भरोसे और चुनावी वादों को पूरा करने की क्षमता पर भी सवाल उठ सकते हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के लिए चुनौती यह होगी कि वह पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को किस तरह संभालते हैं और अपने राजनीतिक एजेंडे को लेकर उठ रहे सवालों का क्या जवाब देते हैं। वहीं, रुहुल्ला के अगले कदम पर भी नजर रहेगी। तीन नवंबर को उनके फैसले के औपचारिक रूप लेने के साथ जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नया घटनाक्रम सामने आ सकता है। फिलहाल, उनके एलान ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर जारी मतभेदों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

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