लोकसभा से भी पास हुआ वंदे मातरम् बिल, विपक्ष के विरोध के बीच दोनों सदनों से मिली मंजूरी

लोकसभा और राज्यसभा से वंदे मातरम् बिल पारित। राष्ट्रीय गीत के अपमान पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान। अब राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार।;

Update: 2026-07-30 11:06 GMT

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को वंदे मातरम् विधेयक लोकसभा से भी पारित हो गया। इससे एक दिन पहले राज्यसभा ने इस विधेयक को मंजूरी दी थी। विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच दोनों सदनों से विधेयक पारित होने के बाद अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।

सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को कानूनी संरक्षण प्रदान करना और उसके सम्मान को सुनिश्चित करना है। विधेयक के दोनों सदनों से पारित होने के बाद इसके कानून बनने की प्रक्रिया का अंतिम चरण राष्ट्रपति की स्वीकृति होगी।

राष्ट्रीय गीत को मिलेगा कानूनी संरक्षण

विधेयक के कानून बनने के बाद ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की तरह कानूनी सुरक्षा प्राप्त होगी। सरकार के अनुसार राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को बनाए रखने और उनके अपमान को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

नए प्रावधानों के तहत राष्ट्रीय गीत का सार्वजनिक रूप से अपमान करना, उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालना या किसी व्यक्ति को ‘वंदे मातरम्’ गाने से रोकना दंडनीय अपराध माना जाएगा।

तीन साल तक की सजा का प्रावधान

विधेयक में प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय गीत का अपमान करता है या उसके सम्मान में बाधा उत्पन्न करता है तो उसे तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। यह दंड व्यवस्था राष्ट्रगान के अपमान से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों के समान होगी।

सरकार का कहना है कि इससे राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूती मिलेगी तथा सार्वजनिक आयोजनों में राष्ट्रीय गीत के सम्मान को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

संसद में हुआ विरोध

लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया और सदन में हंगामा भी हुआ। हालांकि, शोर-शराबे के बीच सदन ने विधेयक को पारित कर दिया। इससे पहले राज्यसभा में भी बहस और विरोध के बाद विधेयक को मंजूरी मिल चुकी थी।

अब सभी औपचारिक संसदीय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा और इसके प्रावधान पूरे देश में लागू होंगे।

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