ममता बनर्जी समेत टीएमसी के कई नेताओं को कानूनी नोटिस, काकोली घोष के बेटे ने की सार्वजनिक माफी की मांग
टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बेटे और मनोवैज्ञानिक डॉ. वैद्यनाथ घोष ने ममता बनर्जी, महुआ मोइत्रा सहित कई नेताओं को कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।;
टिकट मांगने के आरोपों को बताया झूठा
डॉ. वैद्यनाथ घोष का आरोप है कि कुछ नेताओं द्वारा यह दावा किया गया कि उन्होंने बारासत विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए टीएमसी का टिकट मांगा था। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है।
वैद्यनाथ ने कहा कि उनकी राजनीति में आने की कोई इच्छा नहीं है और उन्होंने कभी भी किसी चुनावी टिकट की मांग नहीं की। उनका कहना है कि इन आरोपों के कारण उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचा है।
आईपैक और पार्टी नेताओं पर लगाए आरोप
नोटिस में डॉ. वैद्यनाथ ने दावा किया है कि चुनाव लड़ने का प्रस्ताव उनकी ओर से नहीं आया था, बल्कि कुछ राजनीतिक रणनीतिकारों और पार्टी से जुड़े लोगों ने उनसे संपर्क किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कई लोगों ने उन पर राजनीति में आने और चुनाव लड़ने का दबाव बनाया था।
उन्होंने कुछ व्यक्तियों के नाम भी सार्वजनिक किए हैं और कहा है कि उनसे बार-बार संपर्क कर चुनावी राजनीति में शामिल होने के लिए कहा गया था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसे सभी प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया था।
शराब पीने के आरोपों पर भी जताई आपत्ति
डॉ. वैद्यनाथ ने पूर्व टीएमसी नेता सोनाली गुहा द्वारा लगाए गए शराब सेवन संबंधी आरोपों को भी खारिज किया है। उन्होंने इन बयानों को अपमानजनक और असत्य बताते हुए कहा कि इस प्रकार के आरोप उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और पेशेवर जीवन को प्रभावित करते हैं।
इसके अलावा उन्होंने कल्याण बनर्जी की कुछ टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई है और कहा है कि सार्वजनिक मंचों पर दिए गए ऐसे बयान किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
15 दिन में माफी नहीं तो होगी कानूनी कार्रवाई
अमेरिका के बोस्टन में रहने वाले डॉ. वैद्यनाथ घोष पेशे से मनोवैज्ञानिक हैं और उन्होंने हार्वर्ड तथा लंदन के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। नोटिस में उन्होंने संबंधित नेताओं को 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का समय दिया है।
उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर माफी नहीं मांगी जाती है तो वे मानहानि और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत दीवानी मुकदमा दायर करेंगे। साथ ही उन्होंने दोहराया कि उनका राजनीति से कोई संबंध नहीं है और वे केवल अपने पेशेवर जीवन पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।