यूपी चुनाव से पहले सपा को झटका, तीन बागी विधायक BJP में शामिल; 2027 के टिकट पर नजरें
यूपी में सपा के बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी भाजपा में शामिल हो गए। जानें 2027 चुनाव, राम मंदिर और विकास पर उनके बयान।;
राज्यसभा चुनाव में की थी सपा से बगावत
तीनों विधायकों ने 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के रुख से अलग जाकर बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद से ही उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। वर्ष 2025 में सपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
अब भाजपा में शामिल होने के बाद तीनों विधायकों की राजनीतिक दिशा स्पष्ट हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी उन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव में उनकी मौजूदा सीटों से उम्मीदवार बना सकती है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी टिकट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राम मंदिर और विकास के मुद्दे पर अखिलेश यादव को घेरा
बीजेपी में शामिल होने के बाद विधायकों ने समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर निशाना साधा। विनोद चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि भगवान राम के मंदिर के उद्घाटन के समय पार्टी नेतृत्व का रुख उनकी आस्था के अनुरूप नहीं था। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों की तारीफ करते हुए कहा कि जनता विकास चाहती है और वे इसी उद्देश्य से राजनीति करते हैं।
वहीं, अभय सिंह ने भगवान राम, रामचरितमानस और धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि राम और राष्ट्र के विरोध में खड़े होने वालों का वे विरोध करेंगे। उनके बयानों से साफ है कि तीनों विधायक भाजपा में शामिल होने के बाद धार्मिक आस्था और विकास को अपने राजनीतिक तर्कों के प्रमुख आधार के रूप में पेश कर रहे हैं।
तीनों विधायकों का राजनीतिक सफर
राकेश प्रताप सिंह: अमेठी की गौरीगंज विधानसभा सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह 2012, 2017 और 2022 में लगातार तीन बार सपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान के बाद उनका सपा नेतृत्व से टकराव बढ़ा था।
अभय सिंह: अयोध्या जिले की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह ने 2012 में पहली बार जीत दर्ज की थी। 2017 में उन्हें हार मिली, लेकिन 2022 में उन्होंने फिर चुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी की।
विनोद चतुर्वेदी: जालौन जिले की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी ने 2007 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था। वर्ष 2021 में वह सपा में शामिल हुए और 2022 के विधानसभा चुनाव में कालपी से विधायक बने।
2027 के चुनाव में क्या होगा असर?
तीनों विधायकों का भाजपा में जाना आगामी चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। विधायकों का दावा है कि उनके साथ बड़ी संख्या में स्थानीय सपा नेता और कार्यकर्ता भी भाजपा में शामिल हुए हैं। हालांकि, इसका वास्तविक चुनावी असर आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा। अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा 2027 के चुनाव में इन नेताओं को क्या जिम्मेदारी देती है।