यूपी पुलिस भर्ती में आयु को लेकर योगी सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय, 3 साल की मिली छूट

यूपी पुलिस भर्ती 2025 में बड़ा फैसला लिया गया है। 32679 पदों पर सीधी भर्ती के लिए सभी वर्गों को 3 साल की उम्र में छूट दी गई है।

Update: 2026-01-05 11:13 GMT

लखनऊ। यूपी के लाखों युवाओं के लिए आखिरकार राहत की खबर आ ही गई। यूपी पुलिस में सिपाही भर्ती का सपना अभ्यर्थी जो ओवरएज होने की वजह से आवेदन करने से बाहर हो गए थे अब उनके लिए योगी सरकार बड़ी सौगात लेकर आई है। योगी सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए यूपी पुलिस भर्ती 2025 में सभी वर्गों के लिए उम्र सीमा में तीन साल की छूट देने का ऐलान कर दिया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने आरक्षी नागरिक पुलिस और समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती 2025 के तहत कुल 32679 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। इसी भर्ती से जुड़े एक अहम शासनादेश के जरिए यह साफ किया गया है कि इस बार अधिकतम आयु सीमा में सभी वर्गों को एकमुश्त 3 साल का शिथिलीकरण दिया जाएगा।

किन पदों पर मिलेगी उम्र में छूट

यह आयु शिथिलीकरण यूपी पुलिस के कई अहम पदों पर लागू होगा, जिनमें शामिल हैं -आरक्षी नागरिक पुलिस (पुरुष/महिला)पीएसी आरक्षीसशस्त्र पुलिसविशेष सुरक्षा बलमहिला बटालियनघुड़सवार पुलिसजेल वार्डर (पुरुष/महिला) इन सभी पदों के लिए अब तय अधिकतम उम्र सीमा में तीन साल की अतिरिक्त छूट दी जाएगी।

क्यों लिया गया यह फैसला

दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में भर्तियों में लगातार देरी हुई। कोरोना काल, परीक्षा प्रक्रियाओं और प्रशासनिक कारणों से कई भर्तियां समय पर नहीं निकल पाईं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन युवाओं को हुआ जो सालों से फिजिकल ट्रेनिंग, लिखित परीक्षा और मानसिक तैयारी में लगे थे। भाजपा के कई विधायकों ने इस मुद्दे को सरकार के सामने मजबूती से उठाया। खास तौर पर देवरिया से बीजेपी विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सामान्य वर्ग के युवाओं को भी उम्र में छूट देने की मांग की थी।

शलभ मणि त्रिपाठी ने क्या कहा

विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने अपने पत्र में लिखा कि कई योग्य और मेहनती युवा सिर्फ उम्र सीमा पार होने की वजह से भर्ती से बाहर हो गए हैं। ये वही युवा हैं जो सालों से पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे थे, दौड़, फिजिकल और पढ़ाई सब कुछ किया लेकिन भर्ती देर से आने के कारण उनका मौका छिन गया। उन्होंने इसे न सिर्फ युवाओं बल्कि उनके परिवारों के लिए भी बेहद दुखद बताया और मानवीय आधार पर कम से कम 3 साल की उम्र में छूट देने की मांग की थी, जिसे अब सरकार ने मान लिया है।

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