इंटरनेशनल ट्रेड शो नोएडा में दिखा यूपी की 75 जिलों की महिलाओं का हुनर, गांव से ग्लोबल बाजार तक पहुंचीं उद्यमी

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 75 जिलों की महिला उद्यमियों ने ग्रामीण उत्पादों का प्रदर्शन किया। मसाले, इत्र, हर्बल चाय, पॉटरी और हस्तशिल्प ने खींचा ध्यान।;

Update: 2026-09-28 03:24 GMT
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के गांवों और कस्बों में महिलाओं के हाथों तैयार हो रहे उत्पाद अब स्थानीय हाट-बाजारों से निकलकर बड़े बाजार की ओर बढ़ रहे हैं। ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदेश के सभी 75 जिलों से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमियों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए। यहां ग्रामीण महिलाओं ने न सिर्फ अपने उत्पादों की बिक्री की, बल्कि बड़े खरीदारों, नए ग्राहकों और संभावित बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर भी हासिल किया।

आगरा की जरी-जरदोजी, अमरोहा के मसाले, अयोध्या की हर्बल चाय, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, कन्नौज का इत्र, गोरखपुर की टेराकोटा ज्वेलरी और वाराणसी के कालीन जैसे उत्पादों ने ट्रेड शो में लोगों का ध्यान खींचा। हर स्टॉल के साथ किसी जिले की परंपरा, स्थानीय हुनर और उसे कारोबार में बदलने वाली महिला की कहानी भी जुड़ी नजर आई।

हर जिले के साथ बदलता गया हुनर

ट्रेड शो में प्रदेश की सांस्कृतिक और उत्पाद विविधता एक ही छत के नीचे दिखाई दी। अमरोहा की कौशल्या गौतम मसाले लेकर पहुंचीं तो अयोध्या की रेणु सिंह ने हर्बल चाय और लेमन ग्रास उत्पाद प्रदर्शित किए। आजमगढ़ की रीता प्रजापति ब्लैक पॉटरी और कन्नौज की तारावती इत्र लेकर पहुंचीं। वाराणसी की सीता देवी ने कालीन, फुटमैट और रनर के जरिए बनारस के पारंपरिक हुनर को सामने रखा।

गोरखपुर की सरोज पाल टेराकोटा ज्वेलरी, सहारनपुर की सुधा सैनी लकड़ी के हस्तशिल्प और खिलौने, प्रयागराज की तब्बसुम मकसूद मूंज से बने सामान और प्रतापगढ़ की प्रज्ञा जायसवाल आंवला-मुरब्बा व अचार लेकर ट्रेड शो में शामिल हुईं।

जूट, मूंज, केले के रेशे से लेकर हर्बल उत्पाद तक

महिला उद्यमियों का कारोबार केवल पारंपरिक हस्तशिल्प तक सीमित नहीं है। सिद्धार्थनगर की सरोज देवी ने केले के रेशे से बने उत्पाद तैयार किए हैं। सोनभद्र की मधुबाला हर्बल साबुन, शहद, फिनाइल और जूट बैग लेकर पहुंचीं। खीरी की शफीका जूते, चप्पल और बेल्ट जैसे उत्पादों के साथ मौजूद रहीं।

वहीं चित्रकूट के लकड़ी के खिलौने, बुलंदशहर की खुर्जा पॉटरी, मथुरा के टेराकोटा उत्पाद और ललितपुर के गोमय उत्पादों ने ग्रामीण उद्यमिता के अलग-अलग रूप दिखाए।

बिक्री के साथ बाजार को समझने का मौका

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए उत्पाद तैयार करना कारोबार की पहली सीढ़ी है। इसके बाद उन्हें सही ग्राहक और बाजार तक पहुंचाना भी जरूरी है। इंटरनेशनल ट्रेड शो महिलाओं को सीधे ग्राहकों और संभावित खरीदारों से जोड़ने का मंच दे रहा है।

इससे महिला उद्यमियों को ग्राहक की पसंद, उत्पाद की पैकेजिंग, प्रस्तुति और बड़े बाजार की जरूरतों को समझने का अवसर मिल रहा है। जरी-जरदोजी और चिकनकारी से लेकर कालीन, हैंडलूम, मसाले, शहद, अचार, हर्बल उत्पाद और घरेलू उपयोग की वस्तुओं तक यहां ग्रामीण कारोबार की व्यापक तस्वीर देखने को मिल रही है।

चार क्षेत्रों में दिखी यूपी की अलग पहचान

पश्चिमी यूपी में खुर्जा पॉटरी, सहारनपुर का लकड़ी हस्तशिल्प और बागपत का हैंडलूम आकर्षण का केंद्र है। अवध में अयोध्या की हर्बल चाय और बाराबंकी की चिकनकारी, पूर्वांचल में आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और वाराणसी का कालीन, जबकि बुंदेलखंड में चित्रकूट के लकड़ी के खिलौने और महोबा की पीतल मूर्तियां ग्रामीण हुनर की पहचान बनकर सामने आईं।

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