टीएमसी के बागी सांसदों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सायोनी घोष और यूसुफ पठान समेत 20 को नोटिस

प्रीम कोर्ट ने सायोनी घोष, यूसुफ पठान समेत टीएमसी के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जानें दलबदल विवाद और अभिषेक बनर्जी की याचिका से जुड़ी पूरी जानकारी।;

Update: 2026-08-25 08:01 GMT
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े दलबदल विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी लोकसभा सांसदों को शीर्ष अदालत ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इन सांसदों में अभिनेत्री और सांसद सायोनी घोष, पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं। यह मामला सांसदों के कथित तौर पर दूसरी राजनीतिक पार्टी से जुड़ने और उनकी सदस्यता को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है।

अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई

टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर लोकसभा अध्यक्ष से बागी सांसदों के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं, ने संबंधित सांसदों को नोटिस जारी किया है।

बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष और लोकसभा महासचिव को भी नोटिस जारी करने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए।

दलबदल विरोधी कानून का दिया हवाला

टीएमसी का कहना है कि इन सांसदों ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर लोकसभा चुनाव जीता था। इसके बाद किसी अन्य राजनीतिक संगठन से जुड़ने या उसके साथ विलय का दावा दलबदल विरोधी कानून के दायरे में आता है। पार्टी का तर्क है कि यदि किसी सांसद ने स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ी है, तो संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी सदस्यता पर कार्रवाई की जा सकती है।

लोकसभा अध्यक्ष से पहले भी मिले थे अभिषेक

अभिषेक बनर्जी ने पहले भी इन सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की थीं। इसके बाद उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से इन मामलों पर जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया। रिपोर्ट के मुताबिक, 27 जुलाई को लिखित रूप से याद दिलाने के बाद बनर्जी ने 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात भी की थी।

यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब टीएमसी के 20 सांसदों ने त्रिपुरा स्थित नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) से जुड़ने या उसके साथ विलय का दावा किया और लोकसभा में अलग दल के रूप में मान्यता देने की मांग की।

इन सांसदों के नाम हैं शामिल

टीएमसी की ओर से जिन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है, उनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदर, सायोनी घोष, खलीलुर्रहमान, अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान, मिताली बैग, डॉ. शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार मल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक समेत अन्य नाम शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट में पहले से चल रहा है ऐसा ही मामला

सुप्रीम कोर्ट में दलबदल से जुड़ा एक अन्य मामला भी लंबित है। शिवसेना (यूबीटी) ने अपने छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में जाने के बाद शीर्ष अदालत का रुख किया था। ऐसे में पश्चिम बंगाल का यह मामला भी दलबदल विरोधी कानून और सांसदों की अयोग्यता से जुड़े संवैधानिक सवालों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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