E20 पेट्रोल की जानकारी ग्राहक को देने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से मना किया
पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा डिस्पेंसिंग नोजल और बिल पर लिखने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने हाई कोर्ट जाने को कहा।;
नई दिल्ली। पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा को लेकर उपभोक्ताओं के अधिकार से जुड़ी एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। याचिका में मांग की गई थी कि पेट्रोल पंप पर डिस्पेंसिंग नोजल के ऊपर ग्राहकों को दी जा रही पेट्रोल में एथेनॉल की प्रतिशत मात्रा स्पष्ट रूप से लिखी जाए। इसके अलावा पेट्रोल खरीदने के बाद मिलने वाली रसीद या बिल पर भी एथेनॉल की मात्रा का उल्लेख करने की मांग की गई थी।
याचिका अधिवक्ता एनके गोस्वामी की ओर से दायर की गई थी। उनका तर्क था कि उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि वे जिस ईंधन के लिए भुगतान कर रहे हैं, उसमें कौन-कौन से घटक और कितनी मात्रा में मौजूद हैं।
‘ग्राहक को पता होना चाहिए कि वह क्या खरीद रहा है’
मामले की सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी की पीठ के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मौजूदा व्यवस्था में पेट्रोल की रसीद पर आम तौर पर यह स्पष्ट जानकारी नहीं होती कि ईंधन में कितना एथेनॉल मिलाया गया है।
गोस्वामी ने दलील दी कि उनकी याचिका किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के सूचना के अधिकार से जुड़ी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर उसके घटकों की जानकारी दी जाती है, वैसे ही पेट्रोल में मिलाए गए एथेनॉल की मात्रा भी उपभोक्ताओं को बताई जानी चाहिए।
E20 पेट्रोल का भी उठाया गया मुद्दा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि उनकी मांग एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, खासकर E20, से संबंधित है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता को पेट्रोल खरीदते समय यह स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि वह किस प्रकार का ईंधन खरीद रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी सरकारी नीति को चुनौती नहीं दे रहे, बल्कि केवल पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, अटॉर्नी जनरल की ओर से याचिका पर आपत्ति जताई गई। कोर्ट को बताया गया कि इसी तरह का मुद्दा पहले भी सुप्रीम कोर्ट के सामने आ चुका है और उस पर सुनवाई हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट जाने को कहा
बहस के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से उनकी प्रैक्टिस और मामले के संबंध में सवाल किए। इसके बाद पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अपनी मांग लेकर संबंधित हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
याचिका में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो, ऑटोमोबाइल इंजीनियरों, उपभोक्ता संगठनों और पर्यावरण व जल संसाधन विशेषज्ञों को शामिल कर एक समिति बनाने की मांग भी की गई थी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया है और याचिकाकर्ता के सामने हाई कोर्ट का रास्ता खुला है।