सुप्रीम कोर्ट में कुत्तों के लिए माइक्रोचिपिंग का सुझाव, वकील ने कहा- ये महंगा नहीं पड़ेगा

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले में फिर से सुनवाई शुरू हो गई है. जस्टिस विक्रमनाथ ,जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच कर रही है सुनवाई।

Update: 2026-01-08 07:03 GMT

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले में फिर से सुनवाई शुरू हो गई है। जस्टिस विक्रमनाथ ,जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच सुनवाई कर रही है। कुत्तों पर सुनवाई के दौरान आज भी दिलचस्प दलीलें सामने आईं।

वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने कहा कि जब कुत्तों को अचानक हटाया जाता है तो चूहों की आबादी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि वो तो बीमारी फैलाने वाले होते हैं। उन्होंने दावा किया कि कुत्ते संतुलन बनाए रखते हैं।

कोर्ट इस मामले में सभी पक्षकारों- डाग लवर्स, कुत्तो काटने के शिकार लोगों , एनिमल राइट एक्टिविस्ट की ओर से पेश वकीलो की दलीलें विस्तार से सुन रहा है।

वकील ने कुत्तों की माइक्रो-चिपिंग का दिया सुझाव

एडवोकेट नकुल दीवान ने सुप्रीम कोर्ट को ट्रैप, न्यूटर और रिलीज़ मॉडल का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि कुत्तों के स्वभाव को देखते हुए यह ज़रूरी है कि उन्हें उसी जगह वापस छोड़ा जाए, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। दीवान ने यह भी कहा कि बेंगलुरु में कुत्तों की माइक्रो-चिपिंग शुरू हो गई है और यह महंगा नहीं है।

कम्युनिटी डॉग्स की बढ़ती संख्या पर रोक लगाने की ज़रूरत है: एडवोकेट

सीनियर एडवोकेट नकुल दीवान ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने की बात कही। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि 'कम्युनिटी कुत्तों' की बढ़ती तादाद पर रोक लगाने की ज़रूरत है। दीवान ने कहा कि यह ऐसी समस्या नहीं है, जिसे एक दिन में खत्म किया जा सकता है। हमें कम्युनिटी कुत्तों की बढ़ती संख्या को कम करने की जरूरत है। हम ऐसी स्थिति भी नहीं चाहते, जहां हमारे पास कानून हो, लेकिन उसे लागू न करने की वजह से हमें कोई सख्त कदम उठाना पड़े।

यह मुद्दा कुत्तों से आगे बढ़कर सभी आवारा जानवरों तक फैला

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आवारा कुत्तों के मामले में आगे की दलीलें सुनीं, जिसमें वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने तर्क दिया कि यह मुद्दा कुत्तों से आगे बढ़कर सभी आवारा जानवरों तक फैला है और इसके लिए एक संतुलित नजरिए की जरूरत है।

एडवोकेट ने कोर्ट को बताया कि किसी इलाके से कुत्तों को अचानक हटाने से अक्सर अनचाहे नतीजे निकलते हैं, जिसमें चूहों और बंदरों की आबादी में तेजी से बढ़ोतरी शामिल है। उन्होंने कहा कि चूहे, जो कई बीमारियां फैलाते हैं, कुत्तों की मौजूदगी से कंट्रोल में रहते हैं, और चेतावनी दी कि अचानक दखल देने से यह संतुलन बिगड़ सकता है।

कुत्ते और बिल्लियां दुश्मन हैंः सुप्रीम कोर्ट

गुरुवार को सुनवाई फिर से शुरू करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में एक तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कुत्ते और बिल्लियां स्वाभाविक दुश्मन हैं और बिल्लियां चूहों को कंट्रोल करने में मदद करती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या इसका कुत्तों को हटाने से कोई लेना-देना था? हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहें तो, कुत्ते और बिल्लियां दुश्मन हैं। बिल्लियां चूहों को मारती हैं, इसलिए हमें ज़्यादा बिल्लियों और कम कुत्तों को बढ़ावा देना चाहिए। यही समाधान होगा। हमें बताएं कि आप हॉस्पिटल के गलियारों में कितने कुत्ते घूमते हुए देखना चाहते हैं?

कोर्ट सीनियर एडवोकेट सीयू सिंह की दलीलों का जवाब दे रहा था, जिन्होंने संस्थागत इलाकों से कुत्तों को अचानक हटाने के खिलाफ चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि ऐसे कामों से अक्सर वैक्यूम इफ़ेक्ट होता है, जिससे चूहों की आबादी बढ़ जाती है और दूसरे अनचाहे नतीजे होते हैं।

कपिल सिब्बल ने कुत्तों के खतरे से निपटने के लिए सुझाया नया मॉडल

सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश में बदलाव की मांग करने वाले एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया है कि सभी आवारा कुत्तों को पकड़ना इसका समाधान नहीं है और उन्होंने इंसान-जानवर के बीच टकराव को सुलझाने के लिए एक वैज्ञानिक, विश्व स्तर पर स्वीकार्य तरीके की मांग की। उन्होंने कोर्ट से CSVR मॉडल अपनाने की अपील की। पकड़ो, नसबंदी करो, टीका लगाओ और छोड़ दो। इससे आवारा कुत्तों की आबादी को मैनेज करने में मदद मिलेगी और कुत्ते के काटने की घटनाओं में धीरे-धीरे कमी आएगी।

सड़कों पर आवारा जानवरों की वजह से मौतों पर कोर्ट की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नागरिक अधिकारियों द्वारा नियमों और कोर्ट के निर्देशों को लागू करने में कमियों को उजागर करते हुए कहा कि देश में मौतें सिर्फ़ कुत्तों के काटने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि आवारा जानवरों से जुड़े सड़क हादसों से भी होती हैं।

बेंच ने कहा कि सड़कें कुत्तों और आवारा जानवरों से साफ होनी चाहिए। यह सिर्फ़ कुत्तों के काटने की बात नहीं है, बल्कि सड़कों पर आवारा जानवरों का घूमना भी खतरनाक साबित हो रहा है और हादसों का कारण बन रहा है। सुबह किस कुत्ते का मूड कैसा होगा, यह कोई नहीं जानता। नागरिक निकायों को नियमों, मॉड्यूल और निर्देशों को सख्ती से लागू करना होगा।

Tags:    

Similar News