सरकारी नौकरी में 'जनरल' कैटगरी सीटों पर एससी, एसटी, ओबीसी का भी हक, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की 'डबल बेनिफिट' की दलील

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवेदन पत्र में आरक्षित श्रेणी का उल्लेख कर देना, किसी उम्मीदवार को स्वतः आरक्षित पद पर नियुक्ति का हक नहीं देता है। उसी तरह यदि कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बिना रियायत के सामान्य वर्ग से बेहतर प्रदर्शन करता है तो उसे ओपन कैटेगरी में ही प्रतिस्पर्धा का अधिकार है।

Update: 2026-01-05 06:44 GMT

नई दिल्ली। सरकारी नौकरियों में आरक्षण और मेरिट को लेकर चल रही लंबी बहस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्णविराम लगा दिया है। शीर्ष अदालत ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि आरक्षित वर्ग (SC, ST, OBC और EWS) के उम्मीदवार भी सामान्य श्रेणी (General Category) की सीटों पर नौकरी पाने के हकदार हैं, बशर्ते वे मेरिट में जनरल कैटेगरी के ‘कटऑफ’ (Cutoff) अंक हासिल करें।

यह फैसला न केवल आरक्षित वर्ग के मेधावी छात्रों के लिए बड़ी जीत है, बल्कि यह सामान्य श्रेणी की सीटों की परिभाषा को भी नए सिरे से तय करता है।

यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट की एक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था। राजस्थान हाईकोर्ट ने कुछ पदों के लिए भर्ती निकाली थी, जिसमें उन्होंने एक नियम बनाया था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी की सीटों पर नियुक्ति नहीं दी जाएगी, भले ही उनके नंबर जनरल कटऑफ से ज्यादा क्यों न हों।

हाईकोर्ट का तर्क था कि अगर आरक्षित वर्ग को जनरल सीट दी गई, तो यह उन्हें डबल बेनिफिट (Double Benefit) देने जैसा होगा- पहला आरक्षण का और दूसरा सामान्य सीट का।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया दलील

सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जी मसीह की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट की याचिका को रद्द करते हुए कहा कि मेरिट का सम्मान होना चाहिए।

आरक्षित उम्‍मीदवारों की कट-ऑफ रही थी ज्‍यादा

यह मामला अगस्त 2022 में राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें 2,756 पदों (जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II) के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। चयन प्रक्रिया में 300 अंकों की लिखित परीक्षा और 100 अंकों की कंप्यूटर आधारित टाइपिंग परीक्षा शामिल थी।

नियम के अनुसार, हर श्रेणी में रिक्तियों के पांच गुना उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा के आधार पर टाइपिंग टेस्ट के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाना था। मई 2023 में परिणाम घोषित होने के बाद यह सामने आया कि SC, OBC, MBC और EWS जैसी आरक्षित श्रेणियों की कट-ऑफ सामान्य श्रेणी से अधिक थी। इसके कारण कई ऐसे आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार, जिन्होंने सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए थे, लेकिन अपनी श्रेणी की कट-ऑफ से कम अंक होने के कारण शॉर्टलिस्ट नहीं हो पाए।

इससे आहत उम्मीदवारों ने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के उल्लंघन का आरोप लगाया।

राजस्थान हाईकोर्ट ने ये दिया था फैसला

राजस्‍थान हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि श्रेणीवार शॉर्टलिस्टिंग की प्रक्रिया वैध है, लेकिन जो आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार बिना किसी छूट या रियायत के सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ से अधिक अंक लाते हैं, उन्हें ओपन कैटेगरी में ही शामिल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पहले ओपन/जनरल कैटेगरी की मेरिट लिस्ट केवल योग्यता के आधार पर तैयार की जाए।

इसके बाद आरक्षित श्रेणियों की सूचियां बनाई जाए और जो उम्मीदवार पहले ही ओपन कैटेगरी में चयनित हो चुके हों, उन्हें आरक्षित सूची से बाहर रखा जाए। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने गलत तरीके से बाहर किए गए उम्मीदवारों को टाइपिंग टेस्ट में शामिल होने का अवसर देने का भी आदेश दिया था।

डबल बेनिफिट की दलील को किया खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ताओं की इस दलील को खारिज कर दिया कि इससे आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को “डबल बेनिफिट” मिल जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनरल या ओपन कैटेगरी कोई आरक्षित कोटा नहीं है, यह सभी उम्मीदवारों के लिए केवल मेरिट के आधार पर खुली होती है।

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