राज्यसभा में मोदी सरकार बहुमत से 17 ज्यादा, बिल पास कराने में अब नहीं मुश्किल

Rajya Sabha Election Result: राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने बाजी मारी है। एनडीए का राज्यसभा में बहुमत 140 से अधिक हो गई है। यानी बहुमत के पार। ऐसे में सत्तारूढ़ गठबंधन को बिल पास कराने में दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

Update: 2026-03-17 06:22 GMT

नई दिल्ली। राज्य सभा की 37 सीटों के लिए हुए चुनाव में एनडीए को जबर्दस्त कामयाबी मिली है। जिन 11 सीटों के लिए कल वोट डाले गए उनमें एनडीए ने नौ सीटें जीत लीं। पार्टी ने बिहार और ओडिशा में एक-एक अतिरिक्त सीट जीती जबकि हरियाणा में कांटे की टक्कर के बाद एक सीट उसके खाते में आई। 26 सीटों पर निर्विरोध चुनाव हुआ था जिनमें एनडीए ने 13 सीटें जीती थीं। इस तरह 37 में से एनडीए ने 22 सीटें जीत कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। विपक्ष के खाते में 15 सीटें आई हैं। कांग्रेस के लिए राहत की बात यह है कि उसकी राज्यसभा में विपक्ष के नेता की कुर्सी बची रहेगी।

NDA का शानदार प्रदर्शन

एनडीए ने महाराष्ट्र की सात में से छह, बिहार की सभी पांच, असम की सभी तीन, ओडिशा की चार में से तीन, तमिलनाडु की पांच में से दो, पश्चिम बंगाल की पांच में से एक और हरियाणा और छत्तीसगढ़ की दो में से एक सीट जीती। मनोनीत सांसद रंजन गोगोई का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है जिनकी जगह जल्दी ही मनोनयन होगा और वह सीट भी एनडीए के खाते में ही गिनी जाएगी।

राज्यसभा में NDA को बहुमत

इसका सीधा असर राज्यसभा में देखने को मिलेगा। ऊपरी सदन में एनडीए अब स्पष्ट बहुमत हासिल कर चुका है। भाजपा 106 सीटों के साथ पहले ही सबसे बड़े दल के रूप में मजबूती से खुद को स्थापित कर चुकी थी। ताजा परिणामों के बाद पार्टी की स्थिति और अधिक मजबूत होगी। बीजेपी और उसके सहयोगियों की सीटें बढ़ कर 140 से भी अधिक हो गईं हैं जो महत्वपूर्ण बिलों को पारित कराने में बेहद मददगार साबित होने वाली हैं।

महिला आरक्षण बिल पर क्यों ही रणनीति?

एक ऐसा ही महत्वपूर्ण बिल लोक सभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का है। वैसे तो नारी वंदन अधिनियम कानून बन चुका है लेकिन सरकार की मंशा इसे 2029 के लोक सभा चुनाव में बिना देरी के लागू करने की है. इसके लिए मौजूदा सत्र में ही संविधान संशोधन बिल लाने पर चर्चा हो रही है। सरकार चाहती है कि जनगणना और परिसीमन के कारण इसे लागू करने में देरी न हो। इसके लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि राज्यसभा के नए आंकड़े मॉनसून सत्र से प्रभावी होंगे क्योंकि नए सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल के बाद ही शुरू होगा।

विपक्षी दलों को साध रही है सरकार

संभावना है कि इसी सप्ताह कैबिनेट इस बिल को मंजूरी दे दे और उसके बाद यह बिल संसद में पेश कर दिया जाए। इसके लिए विपक्षी दलों को भी भरोसे में लिया जा रहा है। राज्यसभा के नए आंकड़े और बड़ी जीत सरकार के आत्मविश्वास को और अधिक मजबूत करेंगे।

NDA को राज्यसभा में फिर से बहुमत मिलने से कैसे मजबूत होगी मोदी सरकार?

राज्यसभा में बीजेपी के 106 सांसदों के साथ अब NDA के कुल सांसदों की संख्या 140 हो गई है। यानी NDA को फिर से बहुमत मिल गया। इसके चलते केंद्र की मोदी सरकार और मजबूत होगी।

कोई बड़ा बिल पास कराने के लिए अब उसे BJD, YSRCP या निर्दलीय सांसदों की जरूरत नहीं पड़ेगी। NDA के सांसद इसके लिए काफी होंगे। विपक्ष के वॉकआउट या विरोध के बावजूद बिल अटकेंगे नहीं।

हालांकि भाजपा के नेतृत्व वाले NDA को पिछले 2 साल से राज्यसभा और लोकसभा में बहुमत हासिल है।

भारतीय लोकतंत्र में राज्यसभा का चुनाव इस तरह से होता है कि लोकसभा और राज्यसभा में किसी एक दल को एक समय पर स्पष्ट बहुमत मिलना मुश्किल होता है।

अगर किसी बड़ी पार्टी के पास बहुमत है तो इसका फायदा यह है कि सरकार को क्षेत्रीय दलों या निर्दलीय सांसदों के समर्थन के बदले उनकी अनुचित मांगों के सामने झुकना नहीं पड़ता।

हालांकि इसका नकारात्मक पहलू भी है। जब किसी एक दल के पास लोकसभा और राज्यसभा दोनों जगहों पर बहुमत हो तो संसदीय कामकाज में आम सहमति बनाने की स्थिति कम हो जाती है। बड़ी पार्टी अपने मन से फैसला लेती है। वह छोटे और दूसरे दलों से सलाह नहीं लेती है। यह लोकतंत्र के लिए सेहतमंद स्थिति नहीं है।

1989 तक कांग्रेस पार्टी के पास राज्यसभा में स्पष्ट बहुमत होता था। तब ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस की ही सरकार थी।

लेकिन 1989 के बाद की सभी सरकारों को राज्यसभा में अहम बिल पास कराने में छोटे दलों को साधना पड़ा है या विपक्षी दलों के साथ मिलकर आम सहमति बनानी पड़ी है।

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