डेटा संप्रभुता को लेकर सरकार की चुप्पी पर राहुल गांधी का वार, कहा- भारत को अंधेरे में रखा जा रहा
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भारत की डेटा संप्रभुता को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। इससे पहले लोकसभा में एक अप्रैल को नेता विपक्ष गांधी ने सरकार से डेटा और इसे लेकर अन्य देशों के साथ किए जा रहे समझौतों पर भी कई सवाल पूछे थे। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने तब उनके हर सवाल का लिखित में जवाब दिया था।
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को भारत की डेटा संप्रभुता को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश को वैश्विक तकनीकी दौड़ में अग्रणी होना चाहिए, लेकिन इसके बजाय उसे यह अंधेरे में रखा जा रहा है कि उसके डेटा की सुरक्षा कैसे की जाएगी।
लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि भारत का डेटा उसके लोगों का है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अर्थव्यवस्था में यह सबसे बड़ी ताकतों में से एक हो सकता है - आई बनाने, कंपनियों को बढ़ाने और रोजगार पैदा करने के लिए।
केंद्र सरकार पर लगाए सवालिया निशान
राहुल गांधी ने अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट में कहा, "इसलिए मैंने सरकार से अमेरिका के साथ हालिया व्यापार सौदे के बारे में कुछ महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं: अमेरिका के साथ 'बाधाओं को कम करने' का हमारे डेटा के लिए क्या मतलब है? क्या हमारा स्वास्थ्य डेटा, वित्तीय डेटा और सरकारी डेटाबेस भारत में ही रहेंगे? क्या भारत अभी भी विदेशी कंपनियों को डेटा यहां संग्रहीत करने और इसका इस्तेमाल अपना खुद का एआई बनाने के लिए कर सकता है?"
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "हमारी डेटा संप्रभुता, स्वास्थ्य डेटा, एआई और स्थानीय डेटा भंडारण के बारे में हर सवाल का एक ही जवाब मिलता है: 'ढांचा', 'संतुलन', 'स्वायत्तता' - बड़े शब्द, कोई विशिष्टता नहीं।" उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश को यह बताने से इनकार कर रही है कि वह क्या बातचीत कर रही है।
गांधी ने कहा, "हमें वैश्विक तकनीकी दौड़ में अग्रणी होना चाहिए, लेकिन इसके बजाय हमें इस बारे में अंधेरे में रखा जा रहा है कि भारत के डेटा की सुरक्षा कैसे की जाएगी।" उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को देश के डेटा के संबंध में पारदर्शिता और जवाबदेही का अधिकार है। उन्होंने कहा कि हम एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए अपने डेटा के मालिक होने और उसका उपयोग करने के हकदार हैं।
संसद में राहुल गांधी ने उठाए थे सवाल
एक अप्रैल को लोकसभा में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री से अपने प्रश्न में गांधी ने पूछा था कि सरकार अमेरिका-भारत संयुक्त वक्तव्य के तहत डिजिटल व्यापार के लिए बाधाओं को कम करने की अपनी प्रतिबद्धता को भारत के डेटा स्थानीयकरण नियमों, सीमा-पार डेटा नियमों और व्यापक डिजिटल ढांचे के साथ कैसे सामंजस्य बिठाती है।
उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या नियामक स्वायत्तता की रक्षा के लिए कोई नीतिगत परिवर्तन प्रस्तावित हैं; यदि हां, तो क्या ये प्रतिबद्धताएं महत्वपूर्ण डेटा के स्थानीय भंडारण को अनिवार्य करने, संवेदनशील डिजिटल बुनियादी ढांचे तक विदेशी पहुंच को सीमित करने या कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अब या भविष्य में विनियमित करने की भारत की क्षमता को प्रतिबंधित कर सकती हैं।
केंद्र सरकार ने दिया था ये जवाब
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री जितेंद्र प्रसाद ने अपने लिखित जवाब में कहा था कि भारत का एक जीवंत आईटी पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसका वित्तीय वर्ष 2024-25 में राजस्व 280 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक और निर्यात 225 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। उन्होंने कहा कि यह 60 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है और डिजिटल व्यापार भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है।
उन्होंने कहा, "भारत के मुक्त व्यापार समझौते: भारत सरकार दुनिया भर के संभावित देशों के साथ डिजिटल व्यापार साझेदारी को बढ़ावा देने और विस्तारित करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। भारत ने संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ तीन मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिनमें से प्रत्येक में एक प्रमुख घटक के रूप में एक डिजिटल व्यापार अध्याय शामिल है।" उन्होंने कहा कि इन समझौतों में भारत ने बाजार पहुंच सुरक्षित करते हुए अपने हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा की है।