स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने भेजा नोटिस, शंकराचार्य होने पर उठाया सवाल, 24 घंटे के अंदर मांगा जवाब

Swami Avimukteshwaranand News: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या के दिन रथ पर सवार होकर संगम स्नान करना चाहते थे, लेकिन नियम कायदों का हवाला देते हुए प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उन्हें नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।

Update: 2026-01-20 05:32 GMT

प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेला में मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। सोमवार को दिनभर चले आरोप प्रत्यारोप के दौर के बाद देर रात एक और घटनाक्रम हुआ। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाया है। 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया।

क्या कहा गया नोटिस में

प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन सिविल अपील संख्या 3010/2020 एवं 3011/2020 (जगत गुरु शंकराचार्य ज्योतिष्पीठ विवाद) में सर्वोच्च न्यायालय ने 14 अक्टूबर 2022 को स्पष्ट आदेश पारित किया था कि जब तक अपीलों का अंतिम निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक ज्योतिष्पीठ बदरीनाथ या कोई अन्य संस्था किसी भी व्यक्ति का शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक नहीं कर सकती।

मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित

नोटिस में उल्लेख किया गया है कि उक्त प्रकरण में आईए संख्या 153943/2022 को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से शंकराचार्य पद के लिए किसी भी प्रकार के पट्टाभिषेक पर रोक लगाई है। वर्तमान में इस मामले में कोई नया या संशोधित आदेश पारित नहीं हुआ है और मामला अभी भी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।

यह कृत्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना

इसके बावजूद माघ मेला प्रयागराज 2025-26 के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा अपने शिविर में लगाए गए बोर्ड पर स्वयं को “ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य” दर्शाया गया है। मेला प्राधिकरण का कहना है कि यह कृत्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की श्रेणी में आता है।

बोर्ड का फोटोग्राफ भी लगाया

प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने नोटिस के माध्यम से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा है कि वे किस आधार पर अपने नाम के साथ ‘शंकराचार्य’ शब्द का प्रयोग कर रहे हैं या स्वयं को ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के रूप में प्रचारित/प्रसारित कर रहे हैं। नोटिस के साथ शिविर में लगाए गए बोर्ड के फोटोग्राफ भी संलग्न किए गए हैं, जिन्हें आदेश उल्लंघन के साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

आधी रात नोटिस तामील कराने पहुंचे कानूनगो

नोटिस को तामील कराने के लिए मेला प्रशासन की ओर से सेक्टर-4 कार्यालय में तैनात कानूनगो अनिल कुमार रात 12 बजकर 18 मिनट पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर पहुंचे। उन्होंने शिविर में मौजूद लोगों से नोटिस रिसीव कराने को कहा।

हालांकि, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों ने उस समय नोटिस लेने से इनकार कर दिया। समर्थकों का कहना था कि देर रात शिविर में कोई पदाधिकारी मौजूद नहीं है, इसलिए नोटिस रिसीव कराना संभव नहीं है। उन्होंने कानूनगो से सुबह आने का अनुरोध कर उन्हें वापस कर दिया।

शंकराचार्य से अखिलेश ने फोन पर बात की, सुनिए

अखिलेश से फोन पर बातचीत में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- देखिए जब कोई बच्चा हिंदू धर्म में पैदा होता है, तभी से उसका गंगा नहाने का जन्मसिद्ध अधिकार हो जाता है। मैं तो अपनी लड़ाई अकेला लड़ रहा हूं।

शंकराचार्य बोले- कल भीड़ में हमें भी मार दिया जाता

शंकराचार्य ने कहा- पुलिस एक दिन में चार प्रेस कॉन्फ्रेंस करती है और कहती है कि शंकराचार्य के समर्थक और शिष्यों ने उदंडता की। अगर कोई उदंडता करता है तो प्रशासन को हमसे बात करनी चाहिए। ना कि हमारे लोगों को इस तरह मारना चाहिए। कल बार-बार मुझे पालकी से उतारने की कोशिश की गई। खींचतान कर रहे थे। उसी भीड़ में हमें भी मार दिया जाता। हमारे लोगों को भी मार दिया जाता। अगर लोग मरते तो शंकराचार्य के ऊपर सारा दोष दिया जाता। कहा जाता कि शंकराचार्य के स्नान के दौरान भगदड़ मची और लोग मारे गए।

कैसे शुरू हुआ था विवाद, क्या-क्या हुआ

प्रयागराज माघ मेले में रविवार को मौनी अमावस्या के स्नान के लिए आए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे।

इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने एक साधु को चौकी में पीटा।

इससे शंकराचार्य नाराज हो गए और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। करीब 2 घंटे तक गहमा-गहमी रही।

इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए।

इस पूरे मामले से नाराज शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक पुलिस प्रशासन ससम्मान प्रोटोकॉल के साथ नहीं ले जाएगा, तब तक गंगा स्नान नहीं करूंगा।

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