PoK में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश, पाक सेना ने बरसाई गोलियां, 26 की मौत
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विरोध प्रदर्शनों के बीच तनाव बढ़ गया है। रावलकोट और मुजफ्फराबाद में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की खबरें सामने आई हैं।;
मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों और तनाव का माहौल देखने को मिल रहा है। अवामी एक्शन कमेटी के बैनर तले 7 जून को क्षेत्रव्यापी बंद और प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। इसके बाद कई इलाकों में लोगों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की खबरें सामने आई हैं। प्रदर्शनकारियों ने बढ़ती महंगाई, प्रशासनिक नीतियों और कथित दमन के खिलाफ आवाज उठाई है।
सोमवार को ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भी पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर पीओके मूल के लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा संस्थानों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए क्षेत्र में हालात सुधारने की मांग की। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और स्थानीय दावों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सेना की मौजूदगी और नीतियों का विरोध जताया।
रविवार रात से लेकर सोमवार शाम तक रावलकोट में पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स के दमन में पीओके के कुल 26 लोगों की जान जा चुकी है और कुल 190 से ज़्यादा लोग घायल हैं, जिसमें से कई लोगों के शरीर पर पैलेट गन के छर्रों के निशान हैं। साथ ही पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद में कर्फ्यू लगा हुआ है और पूरा मुजफ्फराबाद इस समय बंद है। आधिकारिक आकड़ों के इतर पीओके के लोग वीडियो बयान जारी करके आरोप लगा रहे हैं की पाकिस्तानी सेना के रावलकोट में दमन में 100 से 150 लोगो की जाने गई हैं।
रावलकोट में हिंसक झड़पों के आरोप
रावलकोट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की खबरें मिली हैं। स्थानीय संगठनों और प्रदर्शनकारियों का दावा है कि सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें गोलीबारी और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप भी शामिल हैं। विभिन्न स्थानीय स्रोतों ने मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए हैं।
हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। कुछ स्थानीय समूहों ने मौतों की संख्या अधिक होने का दावा किया है, जबकि आधिकारिक स्तर पर अलग आंकड़े सामने आए हैं। स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
मुजफ्फराबाद में सख्ती, इंटरनेट सेवाएं प्रभावित
रिपोर्टों के अनुसार, पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद में सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए हैं। कई इलाकों में गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और इंटरनेट सेवाओं में भी व्यवधान की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि संचार सेवाएं बाधित होने से सूचनाओं का आदान-प्रदान प्रभावित हो रहा है।
बढ़ता असंतोष बना चुनौती
विश्लेषकों का मानना है कि हाल के महीनों में पीओके में आर्थिक समस्याओं, महंगाई, बिजली दरों और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर असंतोष बढ़ा है। इसी वजह से विभिन्न संगठनों द्वारा समय-समय पर प्रदर्शन आयोजित किए जाते रहे हैं। ताजा घटनाओं ने एक बार फिर क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
फिलहाल हालात पर नजर रखी जा रही है और विभिन्न पक्षों की ओर से संयम बरतने की अपील की जा रही है। आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।
सरकार ने शुरू किया कत्लेआम
मीर...जेएएसी नेता शौकत मीर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश में कहा, सरकार ने रावलकोट में लोगों का कत्लेआम शुरू कर दिया है। उन्होंने संकल्प लिया कि लॉकडाउन में उनका ग्रुप एकजुट रहेगा।
इंटरनेट निलंबित, बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने कब्जे वाले कश्मीर में टेलीफोन व इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं। इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल की तैनाती कर दी गई है। इनमें संघीय पुलिस बल व पाकिस्तानी रेंजर्स शामिल हैं।
सरकारी दमन से लोगों में आक्रोश
स्थानीय लोग सरकारी दमन की घटनाओं, बिजली की भारी कमी, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और इस क्षेत्र को राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेले जाने जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर लंबे समय से क्रोधित हैं।
मानवाधिकार संगठन ने जताई चिंता
मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर में हिंसा को लेकर चिंता जताई है। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने तथाकथित क्षेत्रीय सरकार के जेएएसी पर प्रतिबंध के फैसले पर भी गंभीर चिंता जताई है।