पीओके में बढ़ते दमन पर अलगाववादी भी नाराज, पाक सेना की कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी हिंसा, गिरफ्तारियों और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर कश्मीरी अलगाववादी हलकों से भी आवाज उठने लगी है। स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की मांग तेज हो गई है।;
नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी अशांति, कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर अब उन वर्गों से भी सवाल उठने लगे हैं, जो लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर अलग रुख रखते रहे हैं। कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन (KDC) के अध्यक्ष डॉ. मुबीन शाह ने पीओके में हो रही घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों का रास्ता अपनाया गया, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ा है। उनके अनुसार, हालात ने नियंत्रण रेखा के दोनों ओर रहने वाले कश्मीरियों को प्रभावित किया है।
‘कश्मीरियों की उम्मीदों का केंद्र रहा है यह क्षेत्र’
डॉ. मुबीन शाह ने कहा कि पीओके को लंबे समय से कश्मीरी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता रहा है। उनके अनुसार, यह केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं बल्कि कई लोगों की उम्मीदों और राजनीतिक आकांक्षाओं का प्रतीक रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान घटनाक्रम ने स्थानीय आबादी में असुरक्षा की भावना बढ़ाई है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों की आवाज को दबाने के बजाय संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
क्या है कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन?
कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन वैश्विक स्तर पर सक्रिय कई कश्मीरी प्रवासी संगठनों का साझा मंच है। इसकी स्थापना वर्ष 2022 में अजरबैजान की राजधानी बाकू में हुई थी। इस मंच में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, तुर्की और यूरोप के विभिन्न देशों में सक्रिय संगठन शामिल हैं।
यह संगठन कश्मीर से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने और विभिन्न राजनीतिक एवं मानवाधिकार विषयों पर अपनी राय रखने के लिए जाना जाता है।
अवामी एक्शन कमेटी के आंदोलन को समर्थन
पीओके में सक्रिय जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन के समर्थन में कुछ संगठनों ने 12 सूत्रीय मांग पत्र भी प्रस्तुत किया है। इसमें कथित तौर पर सुरक्षा बलों द्वारा की गई कार्रवाई की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
साथ ही मांग की गई है कि हिरासत में लिए गए लोगों और हिंसा में हुई मौतों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाए तथा जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।
लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग
संगठनों का कहना है कि स्थानीय आर्थिक, सामाजिक और संवैधानिक मांगों को बलपूर्वक दबाने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान तलाशा जाना चाहिए। उनका मानना है कि संवाद और पारदर्शिता ही क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता का आधार बन सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, पीओके में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और उन पर उठ रहे सवालों ने क्षेत्रीय राजनीति को नया आयाम दे दिया है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार और स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।