पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, रायपुर AIIMS में ली अंतिम सांस; PM मोदी ने जताया गहरा शोक
पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई का 70 वर्ष की उम्र में रायपुर AIIMS में निधन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गहरा शोक व्यक्त किया।;
रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित लोक कलाकार तीजन बाई का रविवार तड़के निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में उपचार के दौरान उन्होंने सुबह करीब 3:15 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन से लोककला जगत, सांस्कृतिक क्षेत्र और देशभर के कला प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है।
एम्स के चिकित्सकों के अनुसार, तीजन बाई को 27 मई से अस्पताल में भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा था। स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आने के बाद रविवार तड़के उनका निधन हो गया।
पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली महान कलाकार
दुर्ग जिले की रहने वाली तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली मंच प्रस्तुति और अनूठी कथा-वाचन शैली के जरिए छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। पंडवानी में महाभारत की कथाओं को संगीत, अभिनय और भावपूर्ण शैली के साथ प्रस्तुत किया जाता है।
तीजन बाई ने दशकों तक देश-विदेश में सैकड़ों प्रस्तुतियां देकर भारतीय लोक संस्कृति का गौरव बढ़ाया। उनकी प्रस्तुति शैली ने लाखों दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया और उन्हें भारत की सबसे प्रतिष्ठित लोक कलाकारों में शामिल कर दिया।
भारतीय लोककला में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि तीजन बाई ने अपनी विलक्षण कला से छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरा को विश्वभर में नई पहचान दिलाई। उनका निधन भारतीय कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। प्रधानमंत्री ने उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी उनके निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर थीं। उन्होंने अपनी प्रतिभा और समर्पण से लोक परंपराओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
लोककला जगत ने खोया एक अमूल्य रत्न
तीजन बाई का निधन भारतीय लोक संस्कृति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। कला जगत से जुड़े अनेक कलाकारों, साहित्यकारों और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। उनके जीवन और कला ने यह साबित किया कि लोक परंपराएं केवल गांवों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व कर सकती हैं।
अपनी अनूठी गायन शैली, अभिनय और महाभारत की जीवंत प्रस्तुतियों के कारण तीजन बाई हमेशा भारतीय लोककला के इतिहास में अमर रहेंगी। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।