SIR विवाद के बीच पी. चिदंबरम का बड़ा दावा, बोले- वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के बावजूद चुनाव नतीजे को इससे जोड़ना सही नहीं
SIR विवाद के बीच कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटाना गलत हो सकता है, लेकिन केवल SIR को तमिलनाडु चुनाव के नतीजे का कारण नहीं माना जा सकता।;
नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने तमिलनाडु चुनाव के नतीजों को लेकर अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल जरूर उठते हैं, लेकिन यह कहना उचित नहीं होगा कि इसी वजह से तमिझगा वेत्री कझगम (TVK) की जीत या DMK की हार हुई।
‘सिर्फ SIR की वजह से चुनाव नतीजा बदला, ऐसा नहीं कहा जा सकता’
शिवगंगा जिले में प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बातचीत में चिदंबरम ने कहा कि वोटर लिस्ट से गलत तरीके से किसी पात्र मतदाता का नाम हटना गंभीर विषय है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर पूरे चुनाव परिणाम को प्रभावित मान लेना तथ्यों से साबित नहीं होता।
चिदंबरम के मुताबिक, तमिलनाडु में TVK को करीब 35 फीसदी वोट मिले और इसलिए उसकी जीत को केवल मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी से जोड़ना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि SIR के दौरान कुछ मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटे हो सकते हैं, लेकिन यह स्थापित करना अलग विषय है कि इससे किसी विशेष चुनाव का अंतिम परिणाम बदला।
13.30 करोड़ नाम हटाए जाने का मुद्दा
चिदंबरम ने SIR के दौरान मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग चरणों में करीब 13.30 करोड़ नाम सूची से हटाए गए। हालांकि, निर्वाचन आयोग इस आंकड़े की व्याख्या अलग तरीके से करता है और कहता है कि यह मुख्य रूप से ड्राफ्ट रोल में आगे नहीं बढ़ाए गए नामों से जुड़ा आंकड़ा है, न कि अंतिम रूप से हटाए गए सभी मतदाताओं की संख्या। SIR प्रक्रिया में दावे, आपत्तियां और सुनवाई की व्यवस्था भी है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में SIR के बाद अपील प्रक्रिया का भी उल्लेख किया। निर्वाचन आयोग के अनुसार, 27.16 लाख हटाए गए मतदाताओं में से 22.21 लाख ने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए अपील की है। अब तक निस्तारित अपीलों में बड़ी संख्या में नाम बहाल किए गए हैं।
सीईसी ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल
चिदंबरम ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता की मांग की। इसी बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई स्वीकार की है।
इस पूरे विवाद के बीच निर्वाचन आयोग का पक्ष है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक सटीक बनाना है, जबकि विपक्षी दल प्रक्रिया और नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं।