नृपेंद्र मिश्र का बड़ा बयान, राम मंदिर प्रबंधन में व्यापक बदलाव जरूरी; चढ़ावा चोरी ने खोली व्यवस्था की खामियां
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बीच नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर प्रबंधन में बड़े बदलाव की मांग की है। उन्होंने पेशेवर प्रबंधन, जवाबदेही और SOP के पालन पर जोर देते हुए मौजूदा व्यवस्था की खामियों की ओर इशारा किया।;
नई दिल्ली। राम मंदिर में दानपात्रों से कथित धनराशि चोरी के मामले के बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर प्रबंधन व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने प्रशासनिक ढांचे की गंभीर कमजोरियों को उजागर कर दिया है और अब पूरे प्रबंधन तंत्र में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है। उनका मानना है कि मंदिर संचालन की जिम्मेदारी अनुभवी और पेशेवर लोगों को सौंपी जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
चढ़ावा चोरी प्रकरण से उठे प्रबंधन पर सवाल
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई राशि में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद पूरे देश में चर्चा तेज हो गई है। मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रहा है।
इसी बीच नृपेंद्र मिश्र ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर की निगरानी, जवाबदेही और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में मौजूद खामियों को भी सामने लाता है। उन्होंने कहा कि भक्तों की आस्था से जुड़े संस्थान में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
पेशेवर प्रबंधन की जरूरत पर दिया जोर
पूर्व आईएएस अधिकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रमुख सचिव रहे नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि उन्होंने औपचारिक रूप से कोई प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन व्यक्तिगत रूप से उनका मानना है कि पूरे प्रबंधन ढांचे का पुनर्गठन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मंदिर जैसे विशाल और महत्वपूर्ण धार्मिक परिसर का संचालन केवल पारंपरिक व्यवस्थाओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसके लिए प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा और निगरानी जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित पेशेवरों की आवश्यकता है।
स्वयंसेवकों के भरोसे चल रही व्यवस्था
नृपेंद्र मिश्र ने मौजूदा प्रणाली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मंदिर में बड़ी संख्या में कार्य स्वयंसेवकों के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, कई लोगों को केवल मौखिक निर्देश दिए जाते हैं और जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण नहीं होता।
उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में लगभग 1500 लोग विभिन्न गतिविधियों में जुड़े हुए हैं, लेकिन कार्यों का लिखित बंटवारा, जवाबदेही और नियंत्रण प्रणाली पर्याप्त रूप से विकसित नहीं है। ऐसी स्थिति में निगरानी की कमजोरियां पैदा होना स्वाभाविक है।
एसओपी लागू होती तो नहीं होती यह स्थिति
नृपेंद्र मिश्र ने यह भी कहा कि उन्होंने वर्ष 2023 से 2025 के बीच जारी उन दस्तावेजों का अध्ययन किया है, जिनमें दान राशि के संग्रहण और गिनती से जुड़ी विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) निर्धारित की गई थी।
उनका कहना है कि यदि इन नियमों और प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया होता, तो आज यह विवाद सामने नहीं आता। उन्होंने संकेत दिया कि निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन में कहीं न कहीं गंभीर चूक हुई है।
ट्रस्ट ने अनियमितताओं से किया इनकार
दूसरी ओर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता से इनकार किया है। ट्रस्ट का कहना है कि सभी खातों का नियमित ऑडिट कराया जाता है और अब तक किसी प्रकार की गड़बड़ी प्रमाणित नहीं हुई है।
हालांकि SIT की जांच जारी है और उसकी रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।