E20 पेट्रोल पर नितिन गडकरी का बड़ा बयान, बोले- शुद्ध पेट्रोल चाहिए तो ज्यादा कीमत चुकानी होगी

E20 पेट्रोल पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि जो लोग शुद्ध 100% पेट्रोल चाहते हैं, उन्हें अधिक कीमत चुकानी होगी। IIT कानपुर ने भी E20 से इंजन या माइलेज पर नुकसान के दावों को खारिज किया।;

Update: 2026-07-15 09:10 GMT

नई दिल्ली। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि जो उपभोक्ता एथनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल का उपयोग नहीं करना चाहते, वे 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल खरीद सकते हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें अधिक कीमत चुकानी होगी। गडकरी ने दोहराया कि अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों में E20 ईंधन से वाहनों के इंजन को किसी प्रकार का नुकसान होने के प्रमाण नहीं मिले हैं।

एक मीडिया इंटरव्यू में गडकरी से पूछा गया कि क्या भविष्य में पेट्रोल पंपों पर E10 ईंधन का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा। इस पर उन्होंने कहा कि जब भारत 20 प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर चुका है और देश के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर E20 ईंधन उपलब्ध है, तो पुराने विकल्प को बड़े स्तर पर उपलब्ध कराना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई उपभोक्ता पूरी तरह शुद्ध पेट्रोल चाहता है, तो वह उसे खरीद सकता है, लेकिन उसकी कीमत अधिक होगी।

E20 को लेकर बढ़ी बहस, कंपनियों ने तेज की गुणवत्ता जांच

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल की गुणवत्ता और वाहनों के प्रदर्शन को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इसके बाद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने अपने रिटेल आउटलेट्स पर ईंधन की गुणवत्ता की जांच और निगरानी बढ़ा दी है।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने ग्राहकों से अपील की है कि यदि ईंधन की गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत हो तो वे सीधे संबंधित पेट्रोल पंप या कंपनी के आधिकारिक ग्राहक सेवा केंद्र पर शिकायत दर्ज कराएं। कंपनियों ने लोगों से अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा न करने की भी सलाह दी है।

IIT कानपुर ने किया E20 का समर्थन

E20 पेट्रोल को लेकर वैज्ञानिक संस्थानों की रिपोर्ट भी सरकार के दावों का समर्थन करती नजर आ रही है। IIT कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की इंजन रिसर्च लैबोरेटरी से जुड़े परियोजना वैज्ञानिक ध्रुव राज करणा ने बताया कि व्यापक परीक्षणों और अनुसंधानों में E20 ईंधन से इंजन को नुकसान, जंग लगने या किसी अन्य तकनीकी समस्या के प्रमाण नहीं मिले हैं।

उन्होंने कहा कि अब तक किए गए परीक्षणों में इंजन की कार्यक्षमता, टिकाऊपन और प्रदर्शन पर E20 का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया है।

माइलेज को लेकर भी सामने आई रिपोर्ट

E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज कम होने की आशंकाओं पर भी IIT कानपुर ने अध्ययन किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि परीक्षणों में माइलेज में कोई उल्लेखनीय कमी दर्ज नहीं हुई। उनके अनुसार वाहन का माइलेज ईंधन से अधिक चालक की ड्राइविंग शैली, सड़क की स्थिति, ट्रैफिक और वाहन के रखरखाव पर निर्भर करता है।

सरकार का मानना है कि एथनॉल मिश्रित ईंधन से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को एथनॉल उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय मिलेगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। वहीं E20 को लेकर जारी बहस के बीच सरकार, तेल कंपनियां और वैज्ञानिक संस्थान लगातार लोगों को तथ्यात्मक जानकारी देने का प्रयास कर रहे हैं।

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