‘पीस बॉन्ड पर साइन नहीं करूंगी’, हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद भी नेहा बोरा का इनकार, बताई वजह
आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर जारी पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 अक्टूबर को उनकी याचिका खारिज कर दी थी।;
नई दिल्ली। दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों को लेकर जारी पीस बॉन्ड के मामले में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि इस तरह के बॉन्ड का इस्तेमाल शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के संवैधानिक अधिकार को सीमित करने के लिए किया जा सकता है। नेहा ने साफ किया है कि वह खुद इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी और न ही आइसा के किसी सदस्य से ऐसा करने को कहेंगी।
यह मामला उस समय चर्चा में आया, जब स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने नेहा बोरा को पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के लिए नोटिस जारी किया। इसके बाद उन्होंने नोटिस को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
‘संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ सकता है’
नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करने के पीछे अपने तर्क भी रखे हैं। उनका कहना है कि यह कदम केवल उनके व्यक्तिगत मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भविष्य में अन्य लोगों के विरोध-प्रदर्शन करने के अधिकार पर भी पड़ सकता है।
नेहा के मुताबिक, यदि ऐसे बॉन्ड का इस्तेमाल शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल लोगों को रोकने के लिए किया जाता है, तो यह चिंता का विषय होगा। उन्होंने कहा कि वह इसीलिए हस्ताक्षर नहीं करेंगी और आइसा का कोई सदस्य भी इस बॉन्ड पर साइन नहीं करेगा।
यह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के संदर्भ में सामने आया है। नेहा बोरा इन प्रदर्शनों को लेकर सक्रिय रही हैं। हालांकि, पीस बॉन्ड को लेकर उनकी आपत्ति और मजिस्ट्रेट की कार्रवाई के आधार पर अदालत का फैसला अलग-अलग पक्षों के तर्कों से जुड़ा है।
17 अक्टूबर को हाई कोर्ट में दाखिल की थी याचिका
पीस बॉन्ड का नोटिस मिलने के बाद नेहा बोरा ने 17 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने अदालत से इस नोटिस पर रोक लगाने की मांग की थी। 23 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के पास संबंधित कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद थे। अदालत की टिप्पणी के अनुसार, नोटिस केवल सुनी-सुनाई बातों पर आधारित नहीं था, बल्कि उसके पीछे परिस्थितियों से जुड़े कारण भी थे।
अदालत ने किन परिस्थितियों का किया जिक्र?
सुनवाई के दौरान अदालत ने उस इलाके की परिस्थितियों का उल्लेख किया, जहां नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया था और जहां वह लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील कर रही थीं। अदालत के अनुसार, संबंधित क्षेत्र व्यावसायिक इलाका है, जहां कार्यालय जाने वालों की आवाजाही रहती है। इसके अलावा, वहां से कई महत्वपूर्ण सड़कें गुजरती हैं, जो शहर के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ती हैं।
इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर मजिस्ट्रेट ने शांति भंग होने की आशंका जताई थी। हाई कोर्ट ने इस कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं किया। इसके बावजूद नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है।
अब इस मामले में आगे की स्थिति पर नजर रहेगी। एक ओर अदालत ने मजिस्ट्रेट की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से मना किया है, वहीं दूसरी ओर नेहा बोरा ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर अपनी आपत्ति दोहराई है।