केरलम के लोक भवन की रसोई में नॉनवेज पर रोक! नए राज्यपाल के फैसले पर विवाद, कांग्रेस ने लगाया ‘संघ एजेंडा’ थोपने का आरोप
केरलम के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने लोक भवन की रसोई में मांसाहारी भोजन बनाने और परोसने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने फैसले की आलोचना करते हुए इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया।;
नई दिल्ली। केरलम के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर अपने एक शुरुआती फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद में घिर गए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने लोक भवन की रसोई में मांसाहारी भोजन तैयार करने और परोसने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। इस फैसले के सामने आने के बाद कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कड़ी आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि राज्यपाल अपनी व्यक्तिगत खान-पान की पसंद दूसरों पर थोपने की कोशिश कर रहे हैं।
इस मामले ने राज्य की खाद्य संस्कृति, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक पद की भूमिका को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि, राज्यपाल कार्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह निर्देश माथुर की निजी खान-पान की आदतों के कारण दिया गया है।
राज्यपाल कार्यालय ने क्या दी सफाई?
स्थानीय मीडिया में आई खबरों के अनुसार, ओम प्रकाश माथुर ने शुक्रवार को पदभार संभालने के बाद लोक भवन की रसोई में नॉनवेज बनाने और परोसने पर रोक लगाने का निर्देश दिया। राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि माथुर पूरी तरह शाकाहारी हैं, इसलिए उन्होंने रसोई में शाकाहारी भोजन ही तैयार करने को कहा।
सूत्रों के मुताबिक, यह व्यवस्था लोक भवन में काम करने वाले सभी कर्मचारियों पर लागू नहीं है। कर्मचारियों को अपनी पसंद का भोजन खाने की स्वतंत्रता है। बताया गया है कि कई कर्मचारी घर से खाना लाते हैं या बाहर भोजन करते हैं।
के.सी. वेणुगोपाल ने फैसले पर उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने राज्यपाल के निर्देश की आलोचना करते हुए कहा कि केरलम की खाद्य संस्कृति विविधता से भरी है। तटीय राज्य होने के कारण यहां मछली और अन्य मांसाहारी व्यंजन लोगों के भोजन का अहम हिस्सा हैं।
वेणुगोपाल के मुताबिक, हर व्यक्ति को अपनी पसंद के अनुसार शाकाहारी या मांसाहारी भोजन चुनने का अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी निजी पसंद के आधार पर ऐसी पाबंदी लगाने का फैसला क्यों करना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह कदम संघ परिवार के कथित ‘भगवा एजेंडे’ को आगे बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल अपनी जीवनशैली के अनुसार भोजन चुनने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन उनकी व्यक्तिगत पसंद को संस्थागत नियम बनाकर दूसरों पर लागू करना उचित नहीं है।
लोक भवन की रसोई में पहले बनता था मांसाहारी भोजन
राज्यपाल कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, लोक भवन की रसोई में तैयार भोजन मुख्य रूप से राज्यपाल और उनके निजी स्टाफ के कुछ सदस्यों को परोसा जाता है। बाकी कर्मचारी आम तौर पर अपना भोजन स्वयं लाते हैं या बाहर से खाते हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि पूर्व के कुछ राज्यपालों के कार्यकाल में रसोई में मछली और मांस से बने व्यंजन तैयार किए जाते थे।
ओम प्रकाश माथुर ने ली 29वें राज्यपाल की शपथ
ओम प्रकाश माथुर ने शुक्रवार को आयोजित समारोह में केरलम के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। केरल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। माथुर ने राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर की जगह ली है, जिन्हें तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
फिलहाल, लोक भवन की रसोई को लेकर उठे विवाद के केंद्र में यही सवाल है कि यह फैसला केवल राज्यपाल की निजी भोजन संबंधी व्यवस्था है या इसका संस्थागत दायरा भी है। राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने कर्मचारियों की खान-पान संबंधी स्वतंत्रता बरकरार रहने की बात कही है, जबकि कांग्रेस ने इस कदम को व्यक्तिगत पसंद थोपने का मामला बताया है।