चांद के करीब पहुंचा नासा का आर्टेमिस II, अपोलो 13 का तोड़ेगा रिकॉर्ड; एस्ट्रोनॉट को हुई बड़ी दिक्कत

नासा का चंद्र मिशन आर्टेमिस II लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इस मिशन को पूरा करते ही आर्टेमिस II 54 साल पहले अपोलो 17 के रिकॉर्ड को तोड़ देगा। नासा की तरफ से इस मिशन और अंतरिक्ष यात्रियों पर पूरी नजर रखी जा रही है। हालांकि, अंतरिक्ष यात्रियों को इस यात्रा के दौरान एक बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ा है।

Update: 2026-04-05 06:57 GMT

नई दिल्ली। चांद की ओर बढ़ रहा आर्टेमिस II मिशन अब इतिहास रचने के करीब पहुंच गया है। यह मिशन 53 साल बाद इंसानों को फिर से चांद के पास ले जा रहा है और इससे उम्मीदें काफी बड़ी हैं। इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जो सोमवार तक चांद के पास पहुंच जाएंगे।

वे चांद के उस हिस्से की तस्वीरें लेंगे, जिसे पृथ्वी से नहीं देखा जा सकता। यह मिशन नासा के पुराने अपोलो प्रोग्राम के बाद अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। अंतरिक्ष यात्री विक्टर ग्लोवर ने बताया कि जैसे-जैसे वे आगे बढ़ रहे हैं, पृथ्वी छोटी दिख रही है और चांद बड़ा होता जा रहा है। यह अनुभव उनके लिए बेहद खास है।

मिशन के दौरान अंतरिक्ष यान में आई एक परेशानी

हालांकि मिशन के दौरान एक छोटी परेशानी भी सामने आई है। अंतरिक्ष यान ओरियन का टॉयलेट ठीक से काम नहीं कर रहा है। लॉन्च के बाद से इसमें बार-बार दिक्कत आ रही है। इंजीनियरों को शक है कि पाइप में बर्फ जमने से समस्या हो रही है। फिलहाल अंतरिक्ष यात्रियों को बैकअप तरीके इस्तेमाल करने पड़ रहे हैं। नासा के अधिकारियों का कहना है कि अंतरिक्ष में टॉयलेट सिस्टम संभालना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन टीम इस स्थिति को अच्छे से संभाल रही है।

अपोलो 13 मिशन के रिकॉर्ड को तोड़ने की तैयारी

यह मिशन एक नया रिकॉर्ड भी बनाने जा रहा है। आर्टेमिस II करीब 4 लाख किलोमीटर दूर तक जाएगा, जो अब तक इंसानों द्वारा तय की गई सबसे ज्यादा दूरी होगी। इससे पहले यह रिकॉर्ड अपोलो 13 मिशन के नाम था। इस मिशन की एक खास बात यह भी है कि इसमें कनाडा के जेरेमी हैनसेन शामिल हैं, जो चांद की ओर जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं। वहीं क्रिस्टीना कोच पहली महिला और विक्टर ग्लोवर पहले अश्वेत (ब्लैक) अंतरिक्ष यात्री हैं, जो इस मिशन का हिस्सा हैं।

प्रशांत महासागर में लैंड करने आर्टेमिस II मिशन

करीब 10 दिन के इस मिशन के बाद 10 अप्रैल को अंतरिक्ष यान प्रशांत महासागर में उतरकर पृथ्वी पर लौटेगा। नासा का यह मिशन भविष्य में चांद पर स्थायी बेस बनाने की दिशा में पहला बड़ा कदम है। एजेंसी का लक्ष्य है कि 2028 तक चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास इंसानों की लैंडिंग कराई जाए।चांद की ओर बढ़ रहा आर्टेमिस II मिशन अब इतिहास रचने के करीब पहुंच गया है। यह मिशन 53 साल बाद इंसानों को फिर से चांद के पास ले जा रहा है और इससे उम्मीदें काफी बड़ी हैं। इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जो सोमवार तक चांद के पास पहुंच जाएंगे। वे चांद के उस हिस्से की तस्वीरें लेंगे, जिसे पृथ्वी से नहीं देखा जा सकता। यह मिशन नासा के पुराने अपोलो प्रोग्राम के बाद अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। अंतरिक्ष यात्री विक्टर ग्लोवर ने बताया कि जैसे-जैसे वे आगे बढ़ रहे हैं, पृथ्वी छोटी दिख रही है और चांद बड़ा होता जा रहा है। यह अनुभव उनके लिए बेहद खास है।

क्या था अपोलो 17 मिशन?

अपोलो 17 चंद्रमा पर इंसानों को उतारने वाला छठा और आखिरी मिशन था। उसने अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी को देखने का एक अनोखा नजरिया प्रदान किया। पिछले अपोलो मिशनों की तुलना में इस मिशन के क्रू ने लूनर रोविंग व्हीकल का इस्तेमाल करके सबसे ज्यादा दूरी तय की। वो चांद से बड़ी मात्रा में चट्टान और मिट्टी के नमूने लेकर धरती पर आए।

क्या है Artemis II मिशन?

Artemis II मिशन अमेरिका अंतरिक्ष एजेंसी नासा के भविष्य के चंद्र अभियानों की तैयारी है। इस मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री चांद के करीब तक जाएंगे, लेकिन वहां उतरेंगे नहीं। यह एक परीक्षण मिशन है। इसका उद्देश्य भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए जरूरी तकनीक और क्षमताओं को परखना है। पूरा मिशन करीब 10 दिनों का है और अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा कर सुरक्षित पृथ्वी पर वापस आ जाएंगे। 

Tags:    

Similar News