चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बनेंगे लूला, पीएम मोदी ने दी बधाई; भारत के लिए क्यों अहम है उनकी जीत?
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर चौथी बार जीत दर्ज की है। पीएम मोदी ने बधाई दी। जानें भारत-ब्राजील व्यापार, रणनीतिक साझेदारी और अहम खनिजों पर इसका असर।;
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लूला को जीत की बधाई देते हुए भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। लूला की वापसी भारत के लिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, डिजिटल तकनीक और वैश्विक मंचों पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश जारी है।
पहले चरण में पिछड़े, दूसरे में पलटी बाजी
लूला की जीत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 4 अक्टूबर को हुए पहले चरण में वह फ्लावियो बोल्सोनारो से पीछे रह गए थे। पहले चरण में फ्लावियो को 47.03 प्रतिशत, जबकि लूला को 45.16 प्रतिशत वोट मिले थे। दूसरे चरण में लूला ने वापसी करते हुए जीत हासिल की।
फ्लावियो, ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के बेटे हैं। चुनाव में दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला रहा। अंतिम नतीजों के अनुसार, लूला को 6.42 करोड़ से अधिक वोट मिले, जबकि फ्लावियो के खाते में करीब 5.98 करोड़ वोट आए।
भारत-ब्राजील साझेदारी क्यों है महत्वपूर्ण?
भारत और ब्राजील के संबंध व्यापार के साथ-साथ रणनीतिक सहयोग पर भी आधारित हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 15.21 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जो 2024 के 12.20 अरब डॉलर से 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।
दोनों देशों के बीच फरवरी 2026 में हुई उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों, डाक सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में सहयोग से जुड़े समझौते भी हुए। भारत के लिए यह सहयोग इसलिए अहम है, क्योंकि वह तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए जरूरी खनिजों की आपूर्ति के नए विकल्प तलाश रहा है।
व्यापार को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य
भारत और ब्राजील ने आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने पर जोर दिया है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, कृषि, दवा उद्योग, डिजिटल तकनीक और खनन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं हैं।
लूला की जीत से मौजूदा साझेदारी को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, व्यापार विस्तार के लिए वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, निवेश और दोनों देशों की घरेलू नीतियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
चौथे कार्यकाल में लूला के सामने चुनौतियां
चुनाव जीतने के बावजूद लूला के सामने संसद में समर्थन जुटाने, महंगाई नियंत्रित करने, सार्वजनिक कर्ज और अर्थव्यवस्था को लेकर कई चुनौतियां रहेंगी। ब्राजील की राजनीति में गहरे वैचारिक मतभेद भी उनकी सरकार के लिए अहम मुद्दा होंगे।
भारत के नजरिये से लूला का नया कार्यकाल व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों और ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर है। अब दोनों देशों के बीच हाल के समझौतों को जमीन पर लागू करना और व्यापारिक लक्ष्यों की दिशा में प्रगति करना प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी।