लालू परिवार मुश्किल दौर में फिर एकजुट, राबड़ी आवास पर तेजप्रताप ने तेजस्वी को लगाया गले और भतीजी पर लुटाया प्यार

मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले लालू यादव के घर का दरवाजा तेजप्रताप यादव के लिए खुल गया। मंगलवार को लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने पटना स्थित राबड़ी देवी के आवास पर पहुंचकर अपने माता-पिता और भाई तेजस्वी यादव से मुलाकात की।

Update: 2026-01-14 06:39 GMT

पटना। बिहार की राजनीति और लालू परिवार के लिए मंगलवार का दिन बड़े बदलाव का संकेत लेकर आया। लंबे समय की दूरियों और राजनीतिक तल्खी के बाद लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के लिए राबड़ी आवास (10 सर्कुलर रोड) के दरवाजे फिर से खुल गए हैं। मकर संक्रांति के पावन अवसर को 'अपनों' को करीब लाने का जरिया बनाते हुए तेजप्रताप ने पूरे परिवार से मुलाकात की।

गले मिले भाई और भतीजी पर लुटाया प्यार

काफी समय बाद यह सुखद तस्वीर सामने आई जब तेजप्रताप यादव ने अपने छोटे भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को गले लगाया। इस मिलन का सबसे भावुक पल तब दिखा जब तेजप्रताप ने अपनी भतीजी कात्यायनी को गोद में लेकर खिलाया। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को साझा करते हुए उन्होंने इस पल को 'अद्भुत' बताया।

ऐतिहासिक दही-चूड़ा भोज का न्योता

तेजप्रताप यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव और माता राबड़ी देवी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। उन्होंने परिवार को 14 जनवरी को अपने आवास पर आयोजित होने वाले ऐतिहासिक दही-चूड़ा भोज के लिए आमंत्रित किया। इससे पहले लालू यादव की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए तेज प्रताप इस बार बड़े स्तर पर भोज दे रहे हैं, जिसमें उन्होंने पक्ष-विपक्ष के तमाम दिग्गजों को बुलाया है।

बुरे दौर में एकजुटता की कोशिश?

यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछला कुछ समय लालू परिवार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में तेजस्वी के नेतृत्व में आरजेडी 25 सीटों पर सिमट गई, वहीं अलग पार्टी बनाकर लड़ने वाले तेज प्रताप को भी महुआ सीट से हार का सामना करना पड़ा। दूसरी तरफ लैंड फॉर जॉब मामले में कोर्ट की ओर से आरोप तय किए जाने और ट्रायल शुरू होने के आदेश ने परिवार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

लालू परिवार ने एकजुट होने का फैसला लिया

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी और परिवार पर आए इस दोहरे संकट के बीच लालू परिवार ने एकजुट होने का फैसला किया है। तेजप्रताप का झुकना और परिवार का उन्हें गले लगाना यह दर्शाता है कि मकर संक्रांति के दही-चूड़े के साथ रिश्तों की खटास भी खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

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