चीन की घुसपैठ पर ओवैसी ने मोदी सरकार को घेरा, संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग
अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा की स्थिति को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। AIMIM प्रमुख ने चीनी सैनिकों की गतिविधियों पर स्पष्ट जानकारी देने और संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की।;
नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा की स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से सीमा पर हो रही गतिविधियों को लेकर जवाब मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी सैनिकों की गतिविधियों और भारतीय जवानों व स्थानीय नागरिकों की आवाजाही से जुड़ी खबरों पर सरकार देश को पूरी जानकारी नहीं दे रही है। ओवैसी ने इस मुद्दे पर संसद का विशेष सत्र बुलाकर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की है।
ITBP डीजी के बयान पर उठाए सवाल
ओवैसी ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर की ओर से अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ लगातार टकराव की जानकारी सामने आने पर चिंता जताई। उन्होंने सवाल किया कि यदि सीमा पर ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो सरकार को वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
AIMIM प्रमुख का कहना है कि सीमा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि वह पहले भी इस मुद्दे पर सवाल उठा चुके हैं, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। हालांकि, सीमा पर घटनाओं की वास्तविक स्थिति और उनसे जुड़े तथ्यों की पुष्टि आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही की जा सकती है।
किन इलाकों में चीनी सैनिकों की गतिविधियां?
ओवैसी ने केंद्र सरकार से उन क्षेत्रों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की, जहां चीनी सैनिकों की गतिविधियों या कथित घुसपैठ की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारतीय गश्ती दलों और स्थानीय नागरिकों को किसी इलाके में जाने से रोका गया है और क्या चीन के सैनिक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि कथित घटनाएं कब से जारी हैं और भारत ने चीन के साथ सैन्य तथा राजनयिक बातचीत में इन मुद्दों को किस तरह उठाया है। ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जून 2020 में चीन सीमा विवाद को लेकर दिए गए बयानों का भी जिक्र करते हुए सरकार से मौजूदा हालात पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
सीमा विवाद पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए राजनयिक और सैन्य स्तर पर बातचीत कर रहे हैं। मंत्रालय के मुताबिक, सीमा पर तनाव तब बढ़ सकता है, जब चीनी सैनिक निर्धारित गश्त व्यवस्था से अलग गतिविधियां करते हैं।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सीमा से जुड़े मामलों के समाधान के लिए दोनों देशों के बीच स्थापित संवाद तंत्र मौजूद हैं। LAC को लेकर समझ बेहतर बनाने और गलतफहमियों से बचने के प्रयास भी जारी हैं।
संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग
ओवैसी ने कहा कि सीमा की स्थिति और चीन के प्रति भारत की नीति पर संसद में खुलकर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने विशेष सत्र बुलाने की मांग करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही जरूरी है।
अब इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से क्या विस्तृत जानकारी सामने आती है, इस पर नजर रहेगी। सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि विपक्ष सरकार से इस विषय पर अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहा है।