नई दिल्ली: अमेरिका में भारतीय जांच एजेंसियों के लिए वांछित गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया की गिरफ्तारी के बाद उनकी पुलिस कस्टडी की तस्वीरें सामने आई हैं। दोनों पर फर्जी पासपोर्ट के जरिए अमेरिका में रहने और वहां से अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क संचालित करने के आरोप हैं। भारतीय जांच एजेंसियों के मुताबिक, दोनों गैंगस्टर अमेरिका में एक साथ रह रहे थे और अमेरिकी एजेंसियों ने उन्हें संयुक्त कार्रवाई में पकड़ा है। सामने आई तस्वीरों में हिमांशु भाऊ काली टी-शर्ट, जबकि नीरज फरीदपुरिया सफेद टी-शर्ट में दिखाई दे रहा है। दोनों गैंगस्टर भारत में हत्या, फिरौती, रंगदारी और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी को भारतीय जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, दोनों को भारत लाने की प्रक्रिया और प्रत्यर्पण से जुड़ी आगे की कार्रवाई के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
कौन है हिमांशु भाऊ
हिमांशु भाऊ का पूरा नाम हिमांशु उर्फ भाऊ रिटोलिया बताया जाता है। वह हरियाणा के रोहतक जिले के रिटोली गांव का रहने वाला है। वर्ष 2002 में जन्मे हिमांशु के बारे में बताया जाता है कि वह कम उम्र में ही अपराध की दुनिया में आ गया था। वर्ष 2020 में वह हिसार के बाल सुधार गृह से करीब 20 अन्य लड़कों के साथ फरार हो गया था। इसके बाद उसका संपर्क जेल में बंद गैंगस्टर नीरज बवाना से हुआ और उसने व्यापारियों से रंगदारी वसूलने के लिए धमकियां देना शुरू कर दिया। समय के साथ हिमांशु ने अपना गिरोह खड़ा कर लिया। हरियाणा, दिल्ली और अन्य राज्यों में उसके खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, फिरौती और हथियारों की तस्करी सहित कई मामले दर्ज बताए जाते हैं। वर्ष 2022 में हरियाणा में 24 घंटे के भीतर हुई तीन हत्याओं के बाद उसका नाम व्यापक रूप से चर्चा में आया। हिमांशु की तलाश में भारतीय एजेंसियां लंबे समय से जुटी थीं। वर्ष 2023 में इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। हरियाणा पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 2.5 लाख रुपये और दिल्ली पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), दिल्ली पुलिस और हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स भी उसकी तलाश कर रही थीं।
एल्विश यादव के घर पर फायरिंग में भी आया था नाम
हिमांशु भाऊ का गिरोह कई चर्चित आपराधिक घटनाओं के कारण सुर्खियों में रहा है। वर्ष 2025 में यूट्यूबर एल्विश यादव के गुरुग्राम स्थित घर के बाहर हुई गोलीबारी की जिम्मेदारी हिमांशु भाऊ के गिरोह ने लेने का दावा किया था। इसके अलावा दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित बर्गर किंग आउटलेट में हुई हत्या और एक कार शोरूम पर गोलीबारी जैसी घटनाओं में भी इस गिरोह का नाम सामने आया था। हिमांशु भाऊ और लॉरेंस बिश्नोई तथा गोल्डी बराड़ के गिरोहों के बीच दुश्मनी की बात भी सामने आती रही है। हालांकि, अलग-अलग घटनाओं में आरोपों और जिम्मेदारी के दावों की पुष्टि संबंधित जांच के आधार पर ही की जानी चाहिए।
नीरज फरीदपुरिया का आपराधिक इतिहास क्या है?
हिमांशु भाऊ के साथ पकड़े गए नीरज फरीदपुरिया पर भी कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसके खिलाफ रंगदारी, मारपीट, अवैध वसूली और संगठित आपराधिक गतिविधियों से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। NIA दोनों गैंगस्टरों के घरों पर छापेमारी भी कर चुकी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नीरज को वर्ष 2012 में हत्या के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2015 में उसे इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। हालांकि, वर्ष 2019 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह विदेश चला गया था। बताया गया है कि नीरज इस साल जमानत पर रिहा होने के बाद निगरानी के लिए टखने में लगाए गए ट्रैकर को हटाकर गिरफ्तारी से बच रहा था। अब अमेरिका में उसकी गिरफ्तारी के बाद भारतीय एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
लास वेगास में मिला हिमांशु भाऊ का ठिकाना
एक रिपोर्ट के मुताबिक, NIA से जुड़े सूत्र ने बताया कि दिल्ली और हरियाणा पुलिस की कई टीमें अमेरिका में हिमांशु भाऊ की तलाश कर रही थीं। तकनीकी निगरानी और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर लास वेगास में उसके ठिकाने का पता लगाया गया। इसके बाद अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जानकारी साझा की गई, जिसके आधार पर कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया गया। दोनों गैंगस्टरों की गिरफ्तारी के बाद अब भारतीय जांच एजेंसियों के सामने उनके कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, फर्जी दस्तावेजों और विदेश में उनकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाने की चुनौती होगी। आगे की कार्रवाई में भारत और अमेरिका की एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हो सकता है।