भाजपा में घमासान, जुएल ओराम का बड़ा आरोप- मुझे केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाने की रच रहे साजिश
केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने भाजपा के कुछ नेताओं पर उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने और बदनाम करने की साजिश का आरोप लगाया। उनके ‘हाथ काटने’ वाले बयान पर विपक्ष ने निशाना साधा।;
ओडिशा की सुंदरगढ़ लोकसभा सीट से छह बार सांसद रह चुके ओराम ने कहा कि पार्टी के कुछ नेताओं को लगता है कि यदि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया तो उन्हें मंत्री बनने का मौका मिल सकता है। उनके इस आरोप के बाद भाजपा के भीतर गुटबाजी की चर्चा तेज हो गई है।
‘पहले चुनाव नहीं लड़ना चाहता था, अब 2029 में जरूर उतरूंगा’
जुएल ओराम ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों ने उनका फैसला बदल दिया है। उन्होंने बताया कि पहले उनका अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का विचार था, लेकिन अब वह 2029 का चुनाव जरूर लड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि वह यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि उनके खिलाफ कथित दुष्प्रचार अभियान के पीछे कौन लोग हैं। ओराम के मुताबिक, उन्होंने इस मामले की शिकायत ओडिशा भाजपा के संगठन महामंत्री से भी की है।
करीबी सहयोगी की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा विवाद
पूरा मामला ओराम के करीबी सहयोगी राकेश पासवान की गिरफ्तारी के बाद चर्चा में आया। पुलिस ने राउरकेला में एक संगठित अपराध से जुड़े मामले में पासवान को हिरासत में लिया है। आरोप है कि उन्होंने एक सरकारी गेस्ट हाउस में अपराध से जुड़े लोगों को कथित तौर पर पनाह दी थी। हालांकि, पासवान ने आरोपों को खारिज किया है।
इस मामले पर ओराम ने पहले कहा था कि कानून को अपना काम करना चाहिए और उन्हें कानूनी कार्रवाई पर कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं पर निशाना साधते हुए राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया।
‘हाथ काटने’ वाली टिप्पणी पर विवाद
बयान के दौरान जुएल ओराम की एक टिप्पणी ने विवाद को और बढ़ा दिया। उन्होंने अपने खिलाफ कथित साजिश और बदनाम करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और ‘हाथ काट देने’ जैसी बात कही।
हालांकि, इस बयान को लेकर विपक्षी दलों ने भाजपा पर हमला बोल दिया है। बीजू जनता दल (BJD) की नेता प्रमिला मलिक ने कहा कि इससे भाजपा के भीतर मौजूद कथित अंतर्विरोध सामने आ गए हैं।
कांग्रेस ने कहा- हिंसक बयान की लोकतंत्र में जगह नहीं
ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने ओराम की भाषा की आलोचना करते हुए इसे असंसदीय और आपत्तिजनक बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा की भाषा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
जुएल ओराम के आरोपों और उनकी विवादित टिप्पणी ने ओडिशा भाजपा में अंदरूनी मतभेदों की चर्चा को फिर हवा दे दी है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाता है।