भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू, 75 हजार भारतीय पेशेवरों को बड़ी राहत

भारत और ब्रिटेन के बीच 15 जुलाई से लागू होने जा रहे व्यापार और सामाजिक सुरक्षा समझौते से 75,000 से अधिक भारतीय पेशेवरों और 900 कंपनियों को लाभ मिलेगा। कर्मचारियों को पांच साल तक दोहरे सामाजिक सुरक्षा अंशदान से छूट मिलेगी।;

Update: 2026-06-18 03:04 GMT
नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) और सामाजिक सुरक्षा समझौता (Double Contribution Convention-DCC) 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। इस समझौते के तहत ब्रिटेन में अस्थायी तौर पर काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। अब उन्हें पांच वर्षों तक ब्रिटेन में सामाजिक सुरक्षा अंशदान (Social Security Contribution) जमा नहीं करना होगा।

सरकार का मानना है कि इस कदम से भारतीय आईटी, तकनीकी और सेवा क्षेत्र की कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

पांच साल तक नहीं देना होगा दोहरा योगदान

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा समझौते का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारतीय कंपनियों द्वारा ब्रिटेन भेजे गए कर्मचारियों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। पहले यह छूट केवल तीन साल के लिए उपलब्ध थी, लेकिन नए समझौते में इसे बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया गया है।

इसका अर्थ है कि कर्मचारी भारत में अपनी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में योगदान जारी रख सकेंगे और उन्हें ब्रिटेन में अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा। इससे कर्मचारियों और कंपनियों दोनों की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।

75 हजार पेशेवरों और 900 कंपनियों को लाभ

सरकारी अनुमान के अनुसार, इस समझौते से 75,000 से अधिक भारतीय पेशेवरों और 900 से ज्यादा भारतीय कंपनियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (IT), परामर्श, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाओं और तकनीकी क्षेत्रों में कार्यरत कंपनियों को इसका बड़ा फायदा मिलने की संभावना है।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसी कंपनियां लंबे समय से इस तरह की व्यवस्था की मांग कर रही थीं, क्योंकि ब्रिटेन उनके प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में शामिल है।

भारतीय आईटी उद्योग को मिलेगी मजबूती

ब्रिटेन भारतीय आईटी उद्योग के लिए दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार माना जाता है। भारतीय आईटी सेवाओं के कुल निर्यात में ब्रिटेन की हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा शुल्क में राहत मिलने से भारतीय कंपनियों की परिचालन लागत घटेगी और वे ब्रिटिश बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय कंपनियों को नए अनुबंध हासिल करने और ब्रिटेन में अपने कारोबार का विस्तार करने में मदद करेगा।

सेवा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग

समझौते का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य दोनों देशों के बीच सेवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी है। इससे उच्च कौशल वाले पेशेवरों की आवाजाही आसान होगी और भारत तथा ब्रिटेन नवाचार, तकनीक और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में एक-दूसरे की क्षमताओं का बेहतर उपयोग कर सकेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार, निवेश, कौशल विकास और वैश्विक सेवा क्षेत्र में भारत की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। 15 जुलाई से लागू होने वाला यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

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