UN में भारत ने पाकिस्तान को दिया करारा जवाब, कहा- झूठे दावों से नहीं बदल सकती जम्मू-कश्मीर की हकीकत

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान की झूठी बयानबाजी से सच्चाई नहीं बदल सकती।;

Update: 2026-06-06 04:05 GMT

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के मंच पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को कड़ा जवाब देते हुए जम्मू-कश्मीर को लेकर उसके दावों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है। सुरक्षा परिषद की वार्षिक रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान की ओर से उठाए गए कश्मीर मुद्दे पर भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा किसी भी प्रकार की झूठी बयानबाजी से इस सच्चाई को बदला नहीं जा सकता।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने पाकिस्तान पर वैश्विक मंचों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग करने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह के प्रयासों से न तो वास्तविकता बदल सकती है और न ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह किया जा सकता है।

पाकिस्तान के बयान पर भारत की सख्त प्रतिक्रिया

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब सुरक्षा परिषद की वार्षिक रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया। पाकिस्तान की ओर से किए गए इन बयानों पर भारत ने तुरंत जवाब देते हुए उन्हें तथ्यहीन और भ्रामक बताया।

पी. हरीश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े सभी विषय भारत के आंतरिक मामले हैं और इस पर किसी अन्य देश की टिप्पणी का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने दोहराया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा।

‘खोखली बयानबाजी से नहीं बदलेगी सच्चाई’

भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान चाहे कितने भी झूठे दावे करे या बार-बार एक ही मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाए, लेकिन इससे जमीनी सच्चाई नहीं बदल सकती।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य के रूप में पाकिस्तान की जिम्मेदारी वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने की है, लेकिन वह बार-बार ऐसे मुद्दों को उठाकर मंच की गरिमा को प्रभावित करने का प्रयास करता है।

भारत ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वास्तविक तथ्यों और इतिहास को ध्यान में रखकर ऐसे बयानों का आकलन करना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र मंच के दुरुपयोग का आरोप

भारत ने पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र के मंच का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। पी. हरीश ने कहा कि पाकिस्तान बार-बार अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का उपयोग करता रहा है।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसे प्रतिष्ठित मंच का उद्देश्य वैश्विक शांति, सहयोग और विकास को बढ़ावा देना है, न कि राजनीतिक प्रचार या विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाना।

गौरतलब है कि पाकिस्तान का सुरक्षा परिषद में दो वर्ष का कार्यकाल इसी वर्ष समाप्त होने वाला है। ऐसे में भारत ने उसके रवैये पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

गिलगित-बाल्टिस्तान चुनावों पर भी भारत का विरोध

संयुक्त राष्ट्र में जवाब देने के साथ-साथ भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान में प्रस्तावित चुनावों को लेकर भी पाकिस्तान के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान जिस क्षेत्र में चुनाव कराने की तैयारी कर रहा है, वह भारत का अभिन्न हिस्सा है और उस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है।

भारत ने कहा कि ऐसे चुनावों के जरिए वास्तविक स्थिति को नहीं बदला जा सकता। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन, राजनीतिक दमन और आर्थिक शोषण की गंभीर शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।

कूटनीतिक मोर्चे पर भारत का सख्त संदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह प्रतिक्रिया केवल पाकिस्तान के आरोपों का जवाब नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत के रुख से अवगत कराने का भी प्रयास है। भारत लगातार यह दोहराता रहा है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा मामला पूरी तरह उसका आंतरिक विषय है और किसी तीसरे पक्ष की इसमें कोई भूमिका नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र में दिए गए इस बयान और गिलगित-बाल्टिस्तान मुद्दे पर दर्ज कराए गए विरोध के माध्यम से भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार के दावों का दृढ़ता से जवाब देता रहेगा।

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