जंग के बीच समंदर में फंसी भारत की 'लाइफलाइन', नेवी ने भेजे विध्वंसक युद्धपोत; ऑपरेशन संकल्प जारी

अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 22 व्यापारिक जहाजों और एलपीजी टैंकरों की सुरक्षित वापसी के लिए भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी में अतिरिक्त युद्धपोत तैनात किए हैं। जानिए 'ऑपरेशन संकल्प' क्या है?

Update: 2026-03-19 06:12 GMT

नई दिल्ली। भारत ओमान की खाड़ी और अरब सागर में अतिरिक्त युद्धपोत भेज रहा है। इसका उद्देश्य अपने कॉमर्शियल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। ऐसी उम्मीद है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से अधिक ईंधन टैंकरों को बाहर निकलने की अनुमति दे सकता है।

नौसेना की तैनाती और रणनीतिब्लूमबर्ग ने मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से लिखा है कि भारतीय नौसेना एहतियाती कदम के तौर पर इस क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स जहाजों सहित आधा दर्जन से अधिक युद्धपोत तैनात कर रही है। नाम न छापने की शर्त पर सूत्रों ने बताया कि ये युद्धपोत होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में तैनात रहेंगे और उस जलमार्ग के अंदर प्रवेश नहीं करेंगे। उनका मुख्य उद्देश्य भारतीय जहाजों को सुरक्षा (एस्कॉर्ट) प्रदान करके उत्तरी अरब सागर के सुरक्षित जलक्षेत्र तक पहुंचाना होगा।

गैस संकट और ईरान के साथ बातचीत

भारत ने हाल ही में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) ले जाने वाले दो सरकारी टैंकरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है और कई अन्य ईंधन जहाजों को वहां से निकालने के लिए ईरान के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग पूरी तरह से बंद है। इस कारण भारत में गैस की भारी किल्लत हो गई है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% एलपीजी आयात मध्य पूर्व से ही करता है।

अमेरिका की मांग पर भारत का स्पष्ट रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मांग की थी कि अन्य देश भी जहाजों को सुरक्षित निकालने में मदद करने के लिए जलडमरूमध्य में अपने युद्धपोत भेजें। नई दिल्ली ने इस पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस सप्ताह की शुरुआत में पत्रकारों से कहा था कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय वार्ता में इस मामले पर कोई चर्चा नहीं हुई। विदेश मंत्रालय और भारतीय नौसेना ने फिलहाल इस मुद्दे पर आधिकारिक टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया है। भारत की लंबे समय से यह नीति रही है कि वह किसी एक देश की एकतरफा कार्रवाई का हिस्सा बनने के बजाय, संयुक्त राष्ट्र (UN) के जनादेश के तहत ही अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियानों में भाग लेता है।

'ऑपरेशन संकल्प' और फंसे हुए जहाज

संघर्ष वाले क्षेत्रों में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजना भारत के लिए कोई नई बात नहीं है। सूत्रों के अनुसार, इन युद्धपोतों की मौजूदा तैनाती 2019 में शुरू किए गए 'ऑपरेशन संकल्प' के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों और व्यापारिक जहाजों की रक्षा करना है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान में फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले 22 जहाज हैं। इनमें 6 एलपीजी (LPG) वाहक, 1 तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) ले जाने वाला जहाज और 4 कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं।

भारतीय नौसेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी डी.के. शर्मा ने बताया कि नौसेना ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास समुद्र में अपनी उपस्थिति बनाए रखती है। इसका मकसद भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों को आश्वस्त करना और निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करना है। इससे पहले 2024 में भी, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से जुड़े समुद्री डकैती के हमलों के बाद नौसेना ने अरब सागर में कम से कम एक दर्जन जहाज तैनात किए थे।

शीर्ष स्तर पर कूटनीतिक प्रयास

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सप्ताह के अंत में बताया था कि उन्होंने क्षेत्र की गंभीर स्थिति को लेकर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ चर्चा की है। इस बातचीत में जलडमरूमध्य के माध्यम से फंसे हुए जहाजों की सुरक्षित निकासी के तरीकों पर भी बात की गई।

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