होर्मुज खुलते ही भारत को राहत, LNG से भरा सुपरटैंकर गुजरात पहुंचा; गैस सप्लाई में होगी सुधार
अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से LNGC Disha सुपरटैंकर भारत के दहेज पोर्ट पहुंचा। 62 हजार टन से अधिक LNG की खेप आने से गैस और LPG सप्लाई में राहत की उम्मीद।;
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री आवाजाही सामान्य होने के साथ ही हजारों टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) लेकर एक सुपरटैंकर भारत पहुंच गया है। गुजरात के भरूच स्थित दहेज बंदरगाह पर एलएनजी से लदा जहाज सुरक्षित पहुंचने के बाद देश में गैस आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं में कमी आने की उम्मीद है।
तीन महीने से अधिक समय बाद भारत पहुंचा LNG कार्गो
जानकारी के अनुसार, माल्टा के ध्वज वाला सुपरटैंकर LNGC Disha कतर से एलएनजी लेकर भारत पहुंचा है। जहाज में करीब 62,370 मीट्रिक टन LNG लदी हुई थी। यह कार्गो मार्च 2026 की शुरुआत में कतर के रास लाफान बंदरगाह से लोड किया गया था, लेकिन क्षेत्रीय तनाव और समुद्री सुरक्षा संकट के कारण लंबे समय तक फंसा रहा।
ईरान-अमेरिका तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई थी। इसी वजह से कई ऊर्जा वाहक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया था। अब शांति समझौते के बाद समुद्री मार्ग खुलने से जहाज अपने गंतव्य तक पहुंचने लगे हैं।
होर्मुज खुलने का पहला बड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह जहाज केवल एक कार्गो नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में सामान्य स्थिति लौटने का संकेत है। LNGC Disha को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरकर भारत पहुंचने वाला पहला प्रमुख एलएनजी टैंकर माना जा रहा है, जिसने हालिया तनाव के बाद सफलतापूर्वक यात्रा पूरी की है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, जहाज के सुरक्षित पहुंचने से घरेलू गैस वितरण नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और औद्योगिक तथा घरेलू जरूरतों के लिए उपलब्धता बेहतर होगी। इससे एलपीजी और गैस आधारित उद्योगों को भी राहत मिल सकती है।
दहेज पोर्ट बना ऊर्जा आपूर्ति का अहम केंद्र
गुजरात का दहेज बंदरगाह देश के प्रमुख एलएनजी आयात केंद्रों में शामिल है। यहां पहुंचने वाले गैस कार्गो का उपयोग विभिन्न राज्यों में ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। ऐसे में लंबे समय से रुकी हुई एलएनजी खेप का पहुंचना रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऊर्जा बाजार में बढ़ा भरोसा
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका-ईरान समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर भी दबाव कम हुआ है। समुद्री व्यापार मार्गों के सामान्य होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता लौट रही है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।