अल नीनो के प्रभाव से भारत में कमजोर पड़ सकता है मानसून, किसानों पर पड़ेगा बड़ा असर

संयुक्त राष्ट्र की संस्था FAO ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के प्रभाव से भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है। इससे धान, मक्का समेत खरीफ फसलों के उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ने की आशंका है।;

Update: 2026-06-16 04:57 GMT

नई दिल्ली। प्रशांत महासागर में सक्रिय हो रही जलवायु घटना अल नीनो (El Nino) को लेकर संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि अल नीनो के प्रभाव से भारत समेत एशिया के कई देशों में मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिसका सीधा असर कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से वर्षा पर निर्भर खरीफ फसलों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।

एफएओ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। यदि ऐसा होता है तो खेतों में नमी की कमी पैदा होगी और धान, मक्का जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून में कमी का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है, क्योंकि देश का बड़ा कृषि क्षेत्र अब भी वर्षा आधारित खेती पर निर्भर है।

धान और मक्का उत्पादन पर असर की आशंका

रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो के कारण मानसूनी वर्षा कमजोर होने पर खरीफ सीजन की फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। धान और मक्का जैसी फसलें पर्याप्त वर्षा पर निर्भर होती हैं। बारिश कम होने से सिंचाई की मांग बढ़ेगी और उत्पादन लागत में भी इजाफा हो सकता है।

एफएओ ने चेतावनी दी है कि यदि उत्पादन घटता है तो इसका असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्यान्न आपूर्ति और बाजार कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। कई देशों को खाद्यान्न आयात बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।

कई एशियाई देशों में सूखे का खतरा

एफएओ का विश्लेषण पिछले 41 वर्षों के उपग्रह आंकड़ों और जलवायु रिकॉर्ड पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के अलावा पाकिस्तान, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, फिलीपींस, इंडोनेशिया और तिमोर-लेस्ते में भी सूखे का जोखिम बढ़ सकता है।

इन देशों में बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है, इसलिए मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां लाखों लोगों की आजीविका को प्रभावित कर सकती हैं। रिपोर्ट में 2015-16 के अल नीनो का उदाहरण देते हुए बताया गया कि उस दौरान भारत में मक्का उत्पादन में लगभग 4 प्रतिशत और धान उत्पादन में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बढ़ेगा दबाव

एफएओ के प्राकृतिक संसाधन अधिकारी जार्ज अल्वार-बेल्ट्रान के अनुसार, कम वर्षा का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ता है। फसल उत्पादन घटने से ग्रामीण आय प्रभावित होती है और पशुपालन क्षेत्र पर भी दबाव बढ़ता है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा अल नीनो पहले के कई चक्रों की तुलना में अधिक गंभीर साबित हो सकता है, क्योंकि दुनिया पहले से ही रिकॉर्ड स्तर के तापमान, जलवायु परिवर्तन और खाद्य असुरक्षा जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में सरकारों और कृषि क्षेत्र को समय रहते तैयारी करने की आवश्यकता है ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

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