तमिलनाडु में सिर्फ एक वोट से हार गए डीएमके के मंत्री के आर पेरियाकरुप्पन

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहां द्रविड़ मुनेत्र कषगम के मंत्री के आर पेरियाकरुप्पन तिरुपत्तूर सीट से महज एक वोट से हार गए। विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम के उम्मीदवार ने महज एक वोट से जीत दर्ज की।;

Update: 2026-05-05 08:26 GMT
चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक बेहद नाटकीय और चौंकाने वाला नतीजा सामने आया है। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के वरिष्ठ नेता और सहकारिता मंत्री के आर पेरियाकरुप्पन तिरुपत्तूर विधानसभा सीट से महज एक वोट से हार गए।

30 राउंड के बाद घोषित हुए नतीजे

करीब 30 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद नतीजे घोषित किए गए, जिसमें सीनिवासा सेतुपति आर को महज एक वोट की बढ़त मिली और इसी अंतर से उन्होंने जीत दर्ज की। सेतुपति को कुल 83,375 वोट मिले, जबकि के आर पेरियाकरुप्पन को एक वोट से हार का सामना करना पड़ा।

2006 में पहली बार चुनाव जीतने के बाद, तिरुप्पत्तूर विधानसभा क्षेत्र ने पहली बार पेरियाकरुप्पन को सत्ता से बाहर करने के लिए मतदान किया है। इस हार के बाद उनका 20 वर्षों का वर्चस्व समाप्त हो गया।

यह हार कई मायनों में अहम मानी जा रही है, क्योंकि पेरियाकरुप्पन राज्य सरकार में मंत्री पद संभाल रहे थे। उनकी हार न सिर्फ DMK के लिए झटका है, बल्कि राज्य की राजनीति में बदलते रुझानों का भी संकेत देती है। इस चुनाव में अभिनेता विजय की पार्टी TVK ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर पारंपरिक राजनीति को चुनौती दी है।

चुनाव बहिष्कार का असर

इस सीट पर आर. पलकुरिची पंचायत के दो हजार से अधिक मतदाताओं ने प्रशासनिक सीमा विवाद के समाधान न होने के कारण मतदान का बहिष्कार किया था। इस बहिष्कार का सीधा असर चुनावी नतीजे पर पड़ा। पीरियाकरुप्पन डीएमके के बड़े नेता माने जाते हैं। वह 2006 से लगातार चार बार तिरुप्पत्तूर से विधायक चुने गए थे। वह 2021 में सत्ता में आने के बाद उन्हें ग्रामीण विकास मंत्री बनाया गया। दिसंबर 2022 में उन्हें सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे पहले वे मानव संसाधन एवं मंदिर प्रशासन मंत्री भी रह चुके हैं। सिवागंगा जिले में पार्टी के जिला सचिव के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पीरियाकरुप्पन का राजनीतिक सफर

पीरियाकरुप्पन ने डीएमके छात्र इकाई से राजनीतिक सफर शुरू किया था। उन्होंने वाणिज्य और कानून में स्नातक की डिग्री हासिल की है। इस हार से डीएमके शिविर में निराशा छा गई। पार्टी के कई नेता इसे स्थानीय मुद्दों और विपक्षी दलों की एकजुट रणनीति का नतीजा मान रहे हैं। वहीं टीवीके समर्थक इस जीत को बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत बता रहे हैं। चुनाव आयोग के अनुसार गिनती पूरी तरह से पारदर्शी रही। अंतिम वोट के अंतर ने पूरे तमिलनाडु का ध्यान इस सीट की ओर खींच लिया।

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