ई दिल्ली। Rs 370 Ki Biryani Row: राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने सोमवार को स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणीत मोरे, मधुर विरली और हिमांशु जांगड़ा की पेशी के दौरान महिलाओं के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े मामलों की सुनवाई की। आयोग के समक्ष तीनों ने अपने बयानों पर खेद जताते हुए माफी मांगी, लेकिन आयोग ने उनकी माफी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। मामले की आगे की जांच और सुनवाई के लिए अगली तारीख भी निर्धारित कर दी गई है।
कॉमेडी के नाम पर अपमानजनक सामग्री
सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कॉमेडी के नाम पर महिलाओं के प्रति अपमानजनक और आपत्तिजनक सामग्री को बढ़ावा दिए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे कंटेंट को सामान्य मान लेना समाज के लिए चिंताजनक है और इससे महिलाओं की गरिमा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि मनोरंजन के नाम पर किसी भी वर्ग, विशेषकर महिलाओं के सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता।
मोरे और जांगड़ा को किया गया था तलब
महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कथित बयानों के मामले में आयोग ने पहले प्रणीत मोरे और हिमांशु जांगड़ा को नोटिस जारी कर तलब किया था। आयोग का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर इस प्रकार की टिप्पणियां न केवल असंवेदनशील हैं, बल्कि महिलाओं के प्रति समाज में गलत संदेश भी देती हैं। दोनों कॉमेडियनों ने सुनवाई के दौरान अपनी बात रखी और माफी भी मांगी, लेकिन आयोग ने इसे पर्याप्त नहीं माना।
मधुर विरली के खिलाफ भी अलग मामला
राष्ट्रीय महिला आयोग ने एक अन्य मामले में स्टैंड-अप कॉमेडियन मधुर विरली को भी नोटिस जारी किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने एक शो के दौरान महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। सोमवार को हुई सुनवाई में मधुर विरली भी आयोग के समक्ष उपस्थित हुए। आयोग ने उनके मामले में भी विस्तृत सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है।
गुरुग्राम के कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद
आयोग के अनुसार, गुरुग्राम में आयोजित एक कार्यक्रम के वीडियो और उससे संबंधित मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लिया गया था। इन वीडियो में कथित तौर पर ऐसे बयान दिए गए थे, जिनमें महिला की सहमति के महत्व को नजरअंदाज किया गया और यौन जबरदस्ती जैसे गंभीर विषयों को हास्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। आयोग का मानना है कि इस तरह की बातें महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के खिलाफ हैं तथा इन्हें सामान्य नहीं माना जा सकता।
'370 रुपये की बिरयानी' वाली टिप्पणी से बढ़ा विवाद
पूरा विवाद उस समय चर्चा में आया जब हिमांशु जांगड़ा ने एक डेट का जिक्र करते हुए कथित तौर पर कहा था कि 370 रुपये की बिरयानी खिलाने के बाद उन्होंने महिला से यौन संबंधों से जुड़े एहसान की उम्मीद की थी। इस बयान का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद इसकी व्यापक आलोचना हुई। कई लोगों ने इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक और असंवेदनशील बताया।
आलोचना के बाद मांगी थी माफी
विवाद बढ़ने के बाद हिमांशु जांगड़ा और प्रणीत मोरे ने सार्वजनिक रूप से अपने बयानों पर खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगी थी। हालांकि, इस बीच हिमांशु जांगड़ा को उनकी कंपनी ने नौकरी से भी हटा दिया। बावजूद इसके, महिला आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए कार्रवाई जारी रखने का फैसला किया।
महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं: आयोग
राष्ट्रीय महिला आयोग ने दोहराया कि महिलाओं की गरिमा और सम्मान सर्वोपरि हैं। आयोग का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसे बयानों को स्वीकार नहीं किया जा सकता, जो महिलाओं के प्रति असम्मान या गलत सोच को बढ़ावा देते हों। आयोग अब अगली सुनवाई में संबंधित पक्षों से और स्पष्टीकरण प्राप्त करेगा तथा मामले में आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।