द्रमुक का सीजेपी को समर्थन, कांग्रेस से बनाई दूरी; परिसीमन बिल पर स्टालिन की चुप्पी से बढ़ी सियासी चर्चा

एमके स्टालिन की अध्यक्षता में द्रमुक ने सीजेपी के एसआईआर विरोधी आंदोलन का समर्थन किया और कांग्रेस के साथ संयुक्त प्रदर्शन से दूरी बनाई। परिसीमन बिल पर पार्टी का रुख चर्चा में है।;

Update: 2026-10-17 10:49 GMT
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) ने अपनी रणनीति को लेकर नया संकेत दिया है। एमके स्टालिन की अध्यक्षता में हुई पार्टी सांसदों की बैठक में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) विरोधी आंदोलन का समर्थन करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराने का फैसला किया गया। वहीं, कांग्रेस के साथ संयुक्त गतिविधियों से दूरी बनाए रखने के रुख ने विपक्षी राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

बैठक से पहले परिसीमन विधेयक को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा थी। हालांकि, बैठक के बाद सामने आए प्रमुख फैसलों में एसआईआर और सीजेपी आंदोलन पर जोर रहा। परिसीमन बिल पर द्रमुक की ओर से कोई नया स्पष्ट रुख सामने नहीं आया।

SIR के खिलाफ आंदोलन को द्रमुक का समर्थन

द्रमुक ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराईं। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और एसआईआर प्रक्रिया समाप्त करने की बात कही।

पार्टी नेताओं ने सीजेपी नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की भी आलोचना की है। द्रमुक का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जुड़े सवालों को उठाने वाले युवाओं की आवाज सुनी जानी चाहिए। हालांकि, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के आरोपों को चुनाव आयोग और भाजपा खारिज करते रहे हैं।

कनिमोझी बोलीं- युवाओं के साथ खड़ी है पार्टी

द्रमुक की उपमहासचिव और संसदीय दल की नेता कनिमोझी करुणानिधि ने एसआईआर के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने के बाद कहा कि पार्टी देश के युवाओं के साथ खड़ी है। स्टालिन भी सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी की निंदा कर चुके हैं और आंदोलनकारियों के समर्थन में बयान दे चुके हैं।

पार्टी का यह रुख ऐसे समय आया है, जब सीजेपी का आंदोलन मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है।

कांग्रेस से दूरी, गठबंधन पर फिलहाल स्पष्टता नहीं

द्रमुक ने कांग्रेस के साथ मिलकर संयुक्त गतिविधियों में शामिल होने से दूरी बनाए रखने का संकेत दिया है। तमिलनाडु में कांग्रेस द्वारा टीवीके सरकार को समर्थन दिए जाने के बाद दोनों दलों के संबंधों में तनाव की खबरें सामने आई हैं।

द्रमुक सांसद ए. राजा ने सीजेपी के साथ संभावित गठबंधन के सवाल पर कहा कि संगठन अभी राजनीतिक पार्टी के रूप में स्थापित नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी माना कि सीजेपी में आगे राजनीतिक प्रभाव पैदा करने की क्षमता हो सकती है। फिलहाल द्रमुक के समर्थन को औपचारिक गठबंधन का ऐलान नहीं माना जा सकता।

परिसीमन बिल पर पार्टी की नजर

परिसीमन विधेयक को लेकर द्रमुक ने पहले दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर संभावित असर की चिंता जताई थी। पार्टी ने इस विषय पर केंद्र के प्रस्तावों का अध्ययन करने की बात कही थी।

ताजा बैठक में एसआईआर और सीजेपी आंदोलन पर स्पष्ट रुख सामने आया, लेकिन परिसीमन बिल पर कोई नया विस्तृत फैसला घोषित नहीं हुआ। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि द्रमुक इस मुद्दे पर अपना रुख कब और किस रूप में स्पष्ट करती है।

कुल मिलाकर, द्रमुक की रणनीति में सीजेपी आंदोलन को समर्थन और कांग्रेस से दूरी दोनों प्रमुख संकेत हैं। इससे विपक्षी दलों के बीच सहयोग, नेतृत्व और चुनाव सुधारों को लेकर आगे की राजनीति पर असर पड़ सकता है।

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