सीजेपी के बाद अब ‘दिमागी नक्सल जनता पार्टी’ की एंट्री, सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ी चर्चा
पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान के बाद सोशल मीडिया पर ‘दिमागी नक्सल जनता पार्टी’ यानी डीएनजेपी नाम से नया अकाउंट सामने आया है। जानें इसकी गतिविधियां और सीजेपी से कनेक्शन।;
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर जारी राजनीतिक बहस अब सोशल मीडिया तक पहुंच गई है। इसी बीच ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के बाद ‘दिमागी नक्सल जनता पार्टी’ (डीएनजेपी) नाम से एक नया अकाउंट सामने आया है।
एक्स पर @डीएनजेपी_इंडिया नाम से मौजूद इस अकाउंट की गतिविधियां सोशल मीडिया यूजर्स के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। अकाउंट कई चर्चित राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों को फॉलो कर रहा है। इनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, यूट्यूबर ध्रुव राठी, कॉमेडियन कुणाल कामरा और अभिनेता प्रकाश राज समेत कई नाम शामिल हैं।
‘सोचो, रिसर्च करो, विरोध करो’ बना स्लोगन
सोशल मीडिया पर डीएनजेपी से जुड़े पेज और अकाउंट तेजी से लोकप्रिय होने का दावा किया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, लॉन्च के शुरुआती समय में ही इसके फॉलोअर्स तेजी से बढ़े और इंस्टाग्राम पर भी बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़े।
इस डिजिटल कैंपेन का स्लोगन ‘सोचो, रिसर्च करो, विरोध करो’ बताया जा रहा है। डीएनजेपी के एक्स हैंडल से एक पोस्ट में खुद को भगत सिंह के विचारों से जोड़ने की बात भी कही गई है।
हालांकि, इस अकाउंट को चलाने वाले लोगों या संगठन की आधिकारिक पहचान और संरचना को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
पीएम मोदी के बयान के बाद शुरू हुआ कैंपेन
यह नया सोशल मीडिया अकाउंट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के भाषण के बाद सामने आया। लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए ‘दिमागी नक्सल’ सोच रखने वाले लोगों को लेकर चेतावनी दी थी।
प्रधानमंत्री ने कहा था कि सशस्त्र नक्सलवाद कमजोर हुआ है, लेकिन कुछ वैचारिक समर्थक हिंसा और अशांति को बढ़ावा देने के अवसर तलाश सकते हैं। उन्होंने ऐसे तत्वों की पहचान करने और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया था।
सीजेपी ने भी पीएम के बयान पर उठाए सवाल
इससे पहले ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) ने भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी को युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों से जोड़कर सवाल उठाए थे। सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास ने कहा था कि सरकार से सवाल पूछने वाले पढ़े-लिखे युवाओं को केवल असहमति के कारण ‘नक्सली’ नहीं कहा जाना चाहिए।
हालांकि, प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में किसी विशेष संगठन का नाम नहीं लिया था। इसके बावजूद उनके बयान पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर सरकार पर निशाना साधा।