वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल और गैस की कीमतों को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि युद्ध में अमेरिका की जीत के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि अमेरिकी जीत के बाद गैस की कीमत पहले तीन डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच सकती है और आगे चलकर यह दो डॉलर प्रति गैलन से भी नीचे जा सकती है। ट्रंप ने अपने संदेशों में एक बार फिर स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था और उसके तेल कारोबार को लेकर भी कई टिप्पणियां कीं।
एक घंटे में ट्रंप के सात पोस्ट
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ करीब एक घंटे के भीतर लगातार सात सोशल मीडिया पोस्ट किए। इनमें उन्होंने ईरान की कमजोर होती अर्थव्यवस्था, घटते तेल निर्यात और मुद्रा की स्थिति को निशाना बनाया। इससे पहले रविवार रात ट्रंप ने ईरान के नक्शे पर अपनी तस्वीर लगाकर भी एक पोस्ट किया था। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा खार्ग द्वीप को लेकर साझा की गई एक एआई तस्वीर की हुई। इसमें द्वीप के तेल प्रतिष्ठानों पर हमले का दृश्य दिखाया गया था और उसके साथ ‘बाय-बाय खार्ग’ लिखा था। खार्ग द्वीप ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्रों में शामिल है।
तेल टैंकरों पर अमेरिका की चेतावनी
ईरान के तेल कारोबार को लेकर अमेरिका की ओर से भी कड़ा रुख सामने आया है। अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि अगर ईरान अमेरिकी जहाजों पर हमला करता है तो उसके तेल टैंकरों को निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने तीन ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों पर हमले का वीडियो भी साझा किया। कमांड के मुताबिक, ये टैंकर उस नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसके जरिए ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड और उसके क्षेत्रीय सहयोगी आर्थिक संसाधन हासिल करते हैं। सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने भी चेतावनी दी कि अमेरिकी जहाजों पर किसी हमले की स्थिति में ईरान के तेल कारोबार पर और बड़ी आर्थिक कीमत थोपी जा सकती है।
ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
अमेरिकी धमकियों के बीच ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने देश की ऊर्जा सुविधाओं पर किसी भी अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान का तेल और गैस उत्पादन तंत्र काफी विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ है और उसकी सुरक्षा आसान नहीं है। गालिबाफ ने कहा कि अगर ईरान की संपत्तियों को निशाना बनाया गया तो अमेरिका को भी जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
नेतन्याहू बोले- ईरानी शासन कमजोर
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ईरान को लेकर आक्रामक रुख कायम रखा। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सरकार कमजोर हो चुकी है और अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए तैयार है और अपने विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने ईरानी शासन के अंत को प्रमुख लक्ष्यों में से एक बताया और कहा कि इससे मध्य पूर्व की स्थिति पर दूरगामी असर पड़ सकता है।
एर्दोगन ने इजरायल पर लगाया आरोप
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने इसके उलट मौजूदा संकट के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल की कार्रवाइयों ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ाया और शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचाया। एर्दोगन ने दावा किया कि इजरायल की कार्रवाई के कारण अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ 14 सूत्री इस्लामाबाद समझौता भी प्रभावित हुआ। उनके अनुसार, संघर्ष की आर्थिक और रणनीतिक कीमत केवल ईरान या खाड़ी देशों को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को चुकानी पड़ रही है।