सीजेपी प्रदर्शन का 33वां दिन: दिल्ली के 16 मेट्रो स्टेशन बंद, सरकार ने फिर भेजा बातचीत का प्रस्ताव

दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के 33वें दिन 16 मेट्रो स्टेशन बंद रहे। सरकार ने दूसरी बार बातचीत का प्रस्ताव भेजा है, जबकि पश्चिम बंगाल से 2,000 CRPF जवान दिल्ली बुलाए गए हैं। पुलिस कार्रवाई पर दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई होगी।;

Update: 2026-07-22 06:45 GMT
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जारी प्रदर्शन के बीच सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। प्रदर्शन के 33वें दिन बुधवार को हजारों समर्थक जंतर-मंतर पर जुटे, जिसके चलते एहतियातन दिल्ली के 16 मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। इसी बीच केंद्र सरकार ने दूसरी बार प्रदर्शनकारियों से बातचीत का प्रस्ताव भेजा है। सीजेपी की ओर से कहा गया है कि इस प्रस्ताव पर पार्टी की कोर कमेटी चर्चा करने के बाद अंतिम निर्णय लेगी।

सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बातचीत के प्रस्ताव की पुष्टि करते हुए कहा कि संगठन सकारात्मक तरीके से सभी पहलुओं पर विचार करेगा। उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला सामूहिक सहमति के बाद ही लिया जाएगा।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, अतिरिक्त सीआरपीएफ की तैनाती

दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 20 अतिरिक्त कंपनियों को राजधानी भेजने का निर्णय लिया है। प्रत्येक कंपनी में लगभग 100 जवान होते हैं, यानी करीब 2,000 सुरक्षाकर्मियों को कोलकाता से एयरलिफ्ट कर दिल्ली लाया जा रहा है।

गृह मंत्रालय के निर्देश पर इन जवानों की तैनाती संसद के मानसून सत्र और राजधानी में चल रहे प्रदर्शनों को देखते हुए की जा रही है। इससे पहले भी दिल्ली पुलिस की सहायता के लिए CRPF और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कई कंपनियां पहले से तैनात हैं।

संसद मार्च हिंसा मामले में 10 FIR दर्ज

दिल्ली पुलिस ने हाल ही में हुए संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के संबंध में अलग-अलग थानों में कुल 10 एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस का आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने RAF के जवानों पर हमला किया, पथराव किया, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और ड्यूटी में बाधा उत्पन्न की।

पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटनास्थल के वीडियो, सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में सुनवाई

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि 18 जुलाई को पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कई लोगों को हिरासत में लिया और जरूरत से अधिक बल प्रयोग किया। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि सुनवाई पूरी होने तक सोनम वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के किसी प्रकार की जबरन कार्रवाई या उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए।

सोनम वांगचुक की सेहत पर भी नजर

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार देर रात गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संभावित बातचीत में उनकी भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बातचीत से निकल सकता है समाधान

सरकार द्वारा दूसरी बार बातचीत की पहल किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में उम्मीद जताई जा रही है कि गतिरोध समाप्त करने की दिशा में कोई सकारात्मक रास्ता निकल सकता है। हालांकि CJP ने स्पष्ट किया है कि किसी भी निर्णय से पहले संगठन की कोर टीम सभी प्रस्तावों पर विस्तार से विचार करेगी।

उधर, संसद का मानसून सत्र जारी है और राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क हैं।

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