बांग्लादेश-चीन की नई साझेदारी से बढ़ी भारत की चिंता, तीस्ता परियोजना और ‘चिकन नेक’ पर रणनीतिक नजर

बांग्लादेश और चीन के बीच तीस्ता नदी समेत 13 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। इस सहयोग से भारत के रणनीतिक सिलिगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) और भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।;

Update: 2026-06-26 03:03 GMT
नई दिल्ली। बांग्लादेश और चीन के बीच तीस्ता नदी समेत कई नदी प्रबंधन परियोजनाओं को लेकर हुए नए समझौते ने दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति को नई दिशा दे दी है। दोनों देशों ने जल प्रबंधन, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और नदी संरक्षण से जुड़े 13 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों में सबसे अधिक चर्चा तीस्ता नदी परियोजना की हो रही है, क्योंकि यह भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील सिलिगुड़ी कॉरिडोर, जिसे 'चिकन नेक' भी कहा जाता है, के बेहद करीब स्थित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना में चीन की बढ़ती भूमिका भविष्य में भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

तीस्ता परियोजना में चीन की एंट्री

बताया जा रहा है कि चीन लंबे समय से तीस्ता नदी के पुनर्विकास और जल प्रबंधन परियोजना में रुचि दिखा रहा था, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब नई सरकार ने चीन को इस परियोजना में सहयोग का अवसर दिया है।

बांग्लादेश ने चीन से नदी के प्रवाह प्रबंधन, कटाव रोकने, सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने और बाढ़ नियंत्रण के लिए तकनीकी एवं वित्तीय सहायता मांगी है। चीन ने भी इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए इंजीनियरिंग सहयोग, तकनीकी विशेषज्ञता और अधिकारियों के प्रशिक्षण का आश्वासन दिया है।

प्रधानमंत्री तारिक रहमान का पहला विदेशी दौरा बना चर्चा का विषय

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान ने अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा के लिए चीन को चुना। इसे क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मलेशिया में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लेने के बाद रहमान सीधे चीन पहुंचे, जहां उन्होंने कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। उनके चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से भी द्विपक्षीय वार्ता करने की योजना है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा ढाका और बीजिंग के बीच बढ़ते रणनीतिक एवं आर्थिक सहयोग का संकेत देती है।

पांच वर्षों की बड़ी नदी विकास योजना

चीनी अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान बांग्लादेश ने अपनी व्यापक जल प्रबंधन योजना भी प्रस्तुत की। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में लगभग 20 हजार किलोमीटर लंबी नदियों और नहरों की सफाई, गाद निकालने, जल संरक्षण और तीस्ता तथा पद्मा नदियों के बेहतर प्रबंधन का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आधुनिक जल संसाधन ढांचे के विकास पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि हर वर्ष आने वाली बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

भारत के लिए क्यों अहम है 'चिकन नेक'

तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। इसका प्रवाह सिलिगुड़ी कॉरिडोर के निकट है, जिसे 'चिकन नेक' कहा जाता है। लगभग 20 से 22 किलोमीटर चौड़ी यह भूमि पट्टी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के शेष हिस्से से जोड़ने वाला एकमात्र स्थलीय संपर्क मार्ग है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र के आसपास चीन की तकनीकी या बुनियादी ढांचे से जुड़ी मौजूदगी बढ़ती है, तो भारत को अपनी सामरिक रणनीति और सीमा सुरक्षा पर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ सकती है। हालांकि किसी भी संभावित सुरक्षा प्रभाव का आकलन भविष्य की परिस्थितियों और परियोजना के वास्तविक स्वरूप पर निर्भर करेगा।

जल समझौते और भविष्य की चुनौतियां

भारत और बांग्लादेश के बीच जल बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वर्ष 1996 में गंगा नदी के जल बंटवारे को लेकर दोनों देशों के बीच 30 वर्षों की संधि हुई थी, जिसकी अवधि इस वर्ष पूरी होने वाली है।

ऐसे समय में बांग्लादेश का चीन के साथ जल प्रबंधन सहयोग बढ़ाना क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। भारत ने भी हाल के वर्षों में तीस्ता बेसिन के संरक्षण और तकनीकी सहयोग का प्रस्ताव दिया था, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम के बाद इस पूरे मुद्दे पर नई रणनीतिक और कूटनीतिक चर्चाएं तेज होने की संभावना है।

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