रणवीर बरार ने बताया कैसे करते हैं प्रेशर का सामना

मुंबई, सेलिब्रिटी शेफ और एक्टर रणवीर बरार इन दिनों अपने क्विज शो 'यस शेफ' को लेकर चर्चा में हैं।;

By :  IANS
Update: 2026-10-16 07:05 GMT

मुंबई, सेलिब्रिटी शेफ और एक्टर रणवीर बरार इन दिनों अपने क्विज शो 'यस शेफ' को लेकर चर्चा में हैं। एक प्रोफेशनल शेफ के तौर पर वह लंबे समय से ऐसे माहौल में काम करते आए हैं, जहां तेजी से काम करना और मुश्किल हालात के बीच खुद को शांत रखना जरूरी होता है।

रणवीर का कहना है कि किचन में काम करने के अनुभव ने उन्हें दबाव से निपटना सिखाया है। जब इंसान यह समझ लेता है कि हर चीज उसके कंट्रोल में नहीं है, तो वह दबाव को बेहतर तरीके से संभाल सकता है।

आईएएनएस ने जब पूछा कि शेफ की जिंदगी में प्रेशर कितना आम है, तो रणवीर बरार ने जवाब देते हुए कहा, ''शेफ के तौर पर हमें दबाव की आदत हो जाती है। हमारा माहौल प्रेशर कुकर जैसा होता है। 'द ट्रेटर्स' में भी लोगों ने मुझसे कहा था कि इतने सारे लोग रो रहे हैं, लेकिन आपको कोई फर्क नहीं पड़ रहा। आप इतने शांत कैसे रह सकते हैं?''

रणवीर ने आगे कहा, ''एक बड़े किचन में करीब 600 कुक एक साथ काम कर रहे होते हैं। कोई इधर भाग रहा होता है, तो कोई उधर। ऐसे में अगर मैं भी बाकी लोगों की तरह भागने लगूं, तो काम ठीक से नहीं हो पाएगा। शेफ के तौर पर काम करने से मैंने सीखा है कि मुश्किल हालात में घबराने के बजाय शांत रहना ज्यादा जरूरी है।''

उन्होंने कहा, ''दबाव से निपटने का एक हिस्सा अनुभव से आता है, जबकि दूसरा हिस्सा इस बात को समझने से जुड़ा है कि हर चीज हमारे हाथ में नहीं होती। जब इंसान हर चीज को कंट्रोल करने की कोशिश छोड़ देता है, तो उसका दबाव भी कम होने लगता है।''

रणवीर ने अपने उस्ताद से मिली सीख का जिक्र करते हुए कहा, ''मेरे उस्ताद ने मुझे सिखाया था कि खाना बनाना मूल रूप से आग जलाने जैसा है, जिसमें इंसान सिर्फ मदद करता है। ऐसे में अगर कोई खुद को आग या खाने से ज्यादा बड़ा समझने लगे, तो वह बेवजह अपने ऊपर दबाव बढ़ा लेता है।''

रणवीर ने कहा, ''सबसे बड़ा दबाव उम्मीदों का होता है। जब हम अपने दिमाग में खुद को बहुत बड़ा बना लेते हैं, तो दबाव भी बढ़ जाता है। अगर हम अपने दिमाग में खुद को छोटा रखें, तो दबाव नहीं रहता।''

उन्होंने कहा, ''कई बार मुश्किल हालात से ज्यादा हमारी अपनी उम्मीदें हमें परेशान करती हैं। जब हम हर काम में परफेक्ट होने या हर चीज अपने हिसाब से करने की कोशिश करते हैं, तो तनाव बढ़ने लगता है। वहीं, अपनी सीमाओं को समझकर और परिस्थितियों को स्वीकार करके काम करना आसान हो सकता है।''

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