R D Burman Biopic: आर डी बर्मन की बायोपिक पर तेजी से काम, निर्देशन करेंगे नीरज पांडे

नीरज पांडे अपनी सटीक कहानी कहने की शैली और शोध-आधारित फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। ए वेडनेसडे, स्पेशल 26 और बेबी जैसी फिल्मों में उन्होंने जटिल विषयों को भी सरल और प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा है। ऐसे में आर डी बर्मन जैसे बहुआयामी कलाकार की जीवनगाथा को बड़े पर्दे पर उतारने की जिम्मेदारी उनके हाथों में जाना फिल्म के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

Update: 2026-02-26 09:23 GMT
मुंबई। R D Burman Biopic: हिंदी सिनेमा में बीते कुछ वर्षों में बायोपिक फिल्मों का सिलसिला लगातार मजबूत हुआ है। संजय दत्त पर आधारित संजू, सिल्क स्मिता से प्रेरित द डर्टी पिक्चर, शकीला की जिंदगी पर बनी शकीला और तमिल सिनेमा की चर्चित फिल्म इरुवर जैसी फिल्मों ने यह साबित किया कि दर्शकों में वास्तविक जीवन की कहानियों को जानने की गहरी उत्सुकता है। दादा साहब फाल्के से लेकर मधुबाला तक, कई दिग्गज हस्तियों पर फिल्में बनाने की योजनाएं कतार में हैं। इसी कड़ी में अब हिंदी फिल्म संगीत के दिग्गज राहुल देव बर्मन, जिन्हें दुनिया ‘पंचम दा’ के नाम से जानती है, की बायोपिक भी चर्चा में आ गई है।

सिनेमाई गलियारों से आ रही ताजा खबरों के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्देशन बेबी और स्पेशल 26 जैसी सफल फिल्मों के निर्देशक नीरज पांडे करेंगे। बताया जा रहा है कि फिल्म पर शुरुआती स्तर का काम काफी आगे बढ़ चुका है और टीम अब इसे औपचारिक रूप देने की तैयारी में है।

नीरज पांडे के हाथों में निर्देशन की कमान

नीरज पांडे अपनी सटीक कहानी कहने की शैली और शोध-आधारित फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। ए वेडनेसडे, स्पेशल 26 और बेबी जैसी फिल्मों में उन्होंने जटिल विषयों को भी सरल और प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा है। ऐसे में आर डी बर्मन जैसे बहुआयामी कलाकार की जीवनगाथा को बड़े पर्दे पर उतारने की जिम्मेदारी उनके हाथों में जाना फिल्म के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, नीरज पांडे इस बायोपिक का स्क्रीनप्ले तैयार कर चुके हैं। कहानी को इस तरह गढ़ा गया है कि पंचम दा के व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के विभिन्न पहलुओं को संतुलित ढंग से प्रस्तुत किया जा सके। फिल्म सिर्फ उनके हिट गीतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके संघर्ष, प्रयोगधर्मिता और बदलते दौर के साथ तालमेल बैठाने की यात्रा को भी दिखाएगी।

शूटिंग की तैयारियां: विदेशों में भी होंगे महत्वपूर्ण दृश्य

सूत्रों के मुताबिक, फिल्म की शूटिंग के लिए स्कॉटलैंड और बुडापेस्ट में कुछ लोकेशन चिन्हित की गई हैं। इन विदेशी लोकेशनों का चयन संभवतः उन दौरों और संगीत कार्यक्रमों को दर्शाने के लिए किया गया है, जिनसे आर डी बर्मन का अंतरराष्ट्रीय संपर्क और प्रभाव जुड़ा रहा। फिल्म की टीम इन स्थानों पर तकनीकी संभावनाओं और दृश्यात्मक विस्तार को ध्यान में रखते हुए तैयारी कर रही है। हालांकि शूटिंग की आधिकारिक तारीखों की घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन संकेत हैं कि कास्टिंग पूरी होते ही प्रोजेक्ट को औपचारिक रूप से लॉन्च कर दिया जाएगा।

कास्टिंग पर मंथन जारी

फिल्म के सबसे अहम पहलुओं में से एक है- आर डी बर्मन की भूमिका निभाने वाले अभिनेता का चयन। अभी तक किसी अभिनेता का नाम आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है। निर्माता और निर्देशक ऐसे चेहरे की तलाश में हैं जो न केवल पंचम दा के व्यक्तित्व को जीवंत कर सके, बल्कि उनके संगीत के प्रति जुनून और भावनात्मक गहराई को भी पर्दे पर विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत कर सके। आर डी बर्मन की खास शैली, उनकी ऊर्जा, उनका हास्यबोध और संगीत के साथ उनका प्रयोगधर्मी रिश्ता इन सभी पहलुओं को निभाना किसी भी अभिनेता के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। यही कारण है कि कास्टिंग को लेकर बेहद सावधानी बरती जा रही है।

संगीत: फिल्म की आत्मा

चूंकि यह बायोपिक भारतीय फिल्म संगीत के एक ऐसे स्तंभ पर आधारित है, जिन्होंने 330 से अधिक फिल्मों में संगीत दिया, इसलिए संगीत इस फिल्म का सबसे महत्वपूर्ण तत्व होगा। पंचम दा ने 1970 और 1980 के दशक में हिंदी फिल्म संगीत को नई दिशा दी। उन्होंने पश्चिमी वाद्ययंत्रों और भारतीय धुनों का ऐसा अनोखा संगम किया, जिसने संगीत प्रेमियों की नई पीढ़ी को प्रभावित किया। ‘दम मारो दम’, ‘महबूबा महबूबा’, ‘चुरा लिया है तुमने’, ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’ और ‘तेरे बिना जिंदगी से’ जैसे गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं। फिल्म में इन रचनाओं की झलक किस तरह और किस संदर्भ में दिखाई जाएगी, यह देखने वाली बात होगी।

सूत्रों का कहना है कि नीरज पांडे स्वयं फिल्म के संगीत पक्ष पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। संभव है कि फिल्म में पंचम दा की मूल धुनों का पुनर्प्रस्तुतीकरण किया जाए या फिर उनकी शैली से प्रेरित नए ट्रैक भी तैयार किए जाएं। संगीत निर्देशन के लिए अनुभवी टीम से बातचीत जारी है।

व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन का संतुलित चित्रण

आर डी बर्मन की जिंदगी सिर्फ सफलता की कहानी नहीं थी। उन्होंने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे। एक समय ऐसा भी आया जब नए दौर के संगीत ने उनकी लोकप्रियता को चुनौती दी। बावजूद इसके, उन्होंने प्रयोग करना नहीं छोड़ा और अपनी पहचान बनाए रखी। फिल्म में उनके पारिवारिक जीवन, रिश्तों और इंडस्ट्री में उनके समीकरणों को भी संवेदनशीलता के साथ दिखाया जाएगा। उनके पिता और प्रसिद्ध संगीतकार सचिन देव बर्मन के साथ उनका संबंध, गायिका आशा भोसले के साथ उनका व्यक्तिगत और पेशेवर जुड़ाव, और बदलते संगीत ट्रेंड्स के बीच उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा—इन सभी पहलुओं को कहानी में शामिल किया जाएगा। निर्माताओं का उद्देश्य किसी विवाद को उभारना नहीं, बल्कि एक ऐसे कलाकार की रचनात्मक यात्रा को सामने लाना है, जिसने हिंदी सिनेमा के संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

बायोपिक की बढ़ती परंपरा में नया अध्याय

हिंदी सिनेमा में बायोपिक का चलन लगातार बढ़ रहा है। दर्शक अब पर्दे पर सिर्फ काल्पनिक कहानियां ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की प्रेरक और रोचक गाथाएं भी देखना चाहते हैं। आर डी बर्मन की बायोपिक इस सिलसिले में एक महत्वपूर्ण जोड़ साबित हो सकती है, क्योंकि यह सिर्फ एक कलाकार की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर की झलक भी होगी।

आधिकारिक घोषणा का इंतजार

फिलहाल फिल्म की कास्टिंग और संगीत पर काम जारी है। जैसे ही इन चरणों को अंतिम रूप दिया जाएगा, प्रोडक्शन हाउस द्वारा इसकी आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना है। पंचम दा के प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के लिए यह परियोजना बेहद खास है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो आने वाले समय में दर्शकों को बड़े पर्दे पर उस शख्सियत की कहानी देखने का मौका मिलेगा, जिसकी धुनों ने पीढ़ियों को झूमने पर मजबूर किया।

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