रिलीज के पहले ही लीक हुई विजय की जन नायकन, भड़के साउथ के सितारे, विजय देवरकोंडा बोले- मुझे बहुत गुस्सा आ रहा

अभिनेता विजय देवरकोंडा की फिल्म 'डियर कॉमरेड' भी रिलीज के बाद लीक हो गई थी। इससे फिल्म के कनेक्शन पर बड़ा प्रभाव पड़ा था। अब उन्होंने थलपति विजय की फिल्म जय नायकन के लीक होने पर दुख और गुस्सा दोनों जाहिर किया है।

Update: 2026-04-12 06:06 GMT

चेन्नई: Jan Nayakan Leak: अभिनेता विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ के ऑनलाइन लीक होने के बाद तमिलनाडु में सियासी और फिल्मी हलकों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। रिलीज से पहले ही फिल्म के इंटरनेट पर उपलब्ध हो जाने से जहां फिल्म इंडस्ट्री में नाराजगी है, वहीं राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने मामले को और तूल दे दिया है।

सुपरस्टार्स की कड़ी प्रतिक्रिया

फिल्म लीक की घटना पर दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज सितारों रजनीकांत, कमल हासन और सूर्या ने कड़ी निंदा की है। तीनों कलाकारों ने इसे फिल्म उद्योग के लिए गंभीर खतरा बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि पायरेसी न केवल निर्माताओं को आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि हजारों लोगों की मेहनत पर भी पानी फेर देती है। साथ ही, उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत तंत्र विकसित किया जाए। वहीं अभिनेता विजय देवरकोंडा की फिल्म 'डियर कॉमरेड' भी रिलीज के बाद लीक हो गई थी। इससे फिल्म के कनेक्शन पर बड़ा प्रभाव पड़ा था। अब उन्होंने थलपति विजय की फिल्म जय नायकन के लीक होने पर दुख और गुस्सा दोनों जाहिर किया है।

विजय की ‘आखिरी फिल्म’ को झटका

एच. विनोथ के निर्देशन में बनी ‘जन नायकन’ को खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि इसे अभिनेता विजय की राजनीति में औपचारिक एंट्री से पहले उनकी आखिरी फिल्म बताया जा रहा था। ऐसे में फिल्म को लेकर दर्शकों और प्रशंसकों के बीच जबरदस्त उत्साह था। लेकिन रिलीज से पहले ही फिल्म के लीक हो जाने से इसकी कमाई और प्रभाव पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

टीवीके का आरोप

इस पूरे मामले ने तब राजनीतिक रंग ले लिया, जब तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के नेता आधव अर्जुन ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जुड़े केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के जरिए फिल्म को लीक कराया। आधव अर्जुन ने यह भी आरोप लगाया कि मुरुगन ने तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज से पहले ही ऑनलाइन उपलब्ध हो जाए। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक रूप से पेश नहीं किया गया है।

भाजपा का पलटवार

टीवीके के आरोपों पर तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने फिल्म लीक की घटना की निंदा करते हुए इसे पूरी तरह अवैध करार दिया, लेकिन भाजपा को इसमें घसीटे जाने पर सवाल उठाए। अन्नामलाई ने कहा, “इस मामले में भाजपा को क्यों घसीटा जा रहा है? फिल्म के रिलीज या लीक होने में पार्टी की कोई भूमिका नहीं है। यह कानून-व्यवस्था का मामला है और इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है।” उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे पायरेटेड कंटेंट का बहिष्कार करें और फिल्म को केवल सिनेमाघरों में ही देखें।

CBFC पर लगे आरोपों का खंडन

वहीं, एक आधिकारिक सूत्र ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सूत्र के अनुसार, सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और तकनीकी रूप से संरक्षित होती है। उन्होंने बताया कि CBFC द्वारा प्रमाणन के लिए प्रस्तुत सभी फिल्मों के लिए ‘केडीएम’ (Key Delivery Message) सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जो पासवर्ड-संरक्षित होता है। इस प्रणाली में बिना अनुमति के किसी भी व्यक्ति के लिए फिल्म की सामग्री तक पहुंचना संभव नहीं है। सूत्र ने टीवीके के आरोपों को “निराधार और भ्रामक” बताया।

पायरेसी पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री में पायरेसी के बढ़ते खतरे को उजागर कर दिया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और टेलीग्राम जैसे माध्यमों के जरिए फिल्मों का लीक होना अब आम होता जा रहा है, जिससे निर्माताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तकनीकी उपाय ही नहीं, बल्कि सख्त कानूनी कार्रवाई और जन जागरूकता भी जरूरी है, ताकि इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

सख्त कार्रवाई की मांग

फिलहाल, ‘जन नायकन’ लीक मामले की जांच की मांग तेज हो गई है। यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियां इस मामले में क्या निष्कर्ष निकालती हैं और क्या वास्तव में किसी साजिश के तहत फिल्म लीक की गई या यह केवल पायरेसी का एक और मामला है। एक ओर फिल्म इंडस्ट्री सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है, तो दूसरी ओर राजनीतिक बयानबाजी ने इस विवाद को और जटिल बना दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला सिनेमा और राजनीति—दोनों ही मोर्चों पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

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