दिशा सालियान मौत मामले की जांच पर कोर्ट की निगरानी की मांग

मुंबई, दिवंगत दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले की जांच को लेकर अब कोर्ट से निगरानी की मांग की गई है।;

By :  IANS
Update: 2026-11-03 09:54 GMT

मुंबई, दिवंगत दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले की जांच को लेकर अब कोर्ट से निगरानी की मांग की गई है। सीबीआई ने अदालत में याचिका दाखिल कर जांच की न्यायिक निगरानी की मांग की है। इस याचिका पर 18 नवंबर को सुनवाई होनी है।

मामले में वकील नीलेश ओझा ने जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिशा की मौत को छह साल बीत जाने के बाद भी कुछ अहम गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए गए हैं। उनका तर्क है कि जांच में हो रही देरी के कारण अदालत की निगरानी जरूरी हो गई है।

सुनवाई के दौरान वकील नीलेश ओझा ने दलील दी कि तीन अहम गवाहों के बयान तय 60 दिनों की समय सीमा के भीतर दर्ज नहीं किए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली से जुड़े मोबाइल लोकेशन रिकॉर्ड और दूसरी जानकारियां अदालत में जमा कराई गई हैं। हालांकि, दो अधिकारियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

बता दें कि दिशा सालियान एक सेलिब्रिटी मैनेजर थीं। वह दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर भी रह चुकी थीं। 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक रिहायशी इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। उस समय मुंबई पुलिस ने इस मामले में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की थी। पुलिस की शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या का मामला बताया गया था।

दिशा की मौत के महज छह दिन बाद 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत भी अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे। दोनों की मौत के बीच कम समय का अंतर होने के कारण कई तरह के सवाल उठे थे। हालांकि, दोनों मामलों के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि नहीं हुई थी।

दिशा के पिता सतीश सालियान ने बेटी की मौत को लेकर जांच पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी के साथ यौन उत्पीड़न हुआ और फिर उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने मामले में सबूतों को दबाने और जांच में लापरवाही के आरोप भी लगाए थे। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया और मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी।

दिशा की मौत के करीब छह साल बाद 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले में अहम आदेश दिया था। कोर्ट ने सीबीआई को मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने, उनके पिता का बयान दर्ज करने और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी।

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