दीया मिर्जा के दिवाली वीडियो पर सियासी घमासान, मेयर रितु तावड़े बोलीं- हमें त्योहार मनाना सिखाने की जरूरत नहीं

बीएमसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मेयर रितु तावड़े ने कहा कि हिंदू अपनी परंपराओं और त्योहारों को मनाने का तरीका अच्छी तरह जानते हैं। उन्होंने अभिनेत्री पर चुनिंदा एजेंडे के तहत काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनका रुख हिंदुत्व के प्रति विरोध का रहा है। तावड़े के मुताबिक, इसी वजह से उन्होंने दीया मिर्जा के वीडियो का विरोध किया।;

Update: 2026-11-02 11:28 GMT

मुंबई: Diwali firecracker Controversy: अभिनेत्री दीया मिर्जा के 'प्रदूषण मुक्त दिवाली' अभियान से जुड़े वीडियो को बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के सोशल मीडिया पेज से हटाए जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में विवाद तेज हो गया है। मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने सोमवार को बीएमसी के इस फैसले का समर्थन करते हुए अभिनेत्री पर हिंदुत्व का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को दिवाली कैसे मनानी चाहिए, यह बताने के लिए दीया मिर्जा की जरूरत नहीं है। वहीं, अभिनेत्री ने वीडियो हटाए जाने पर निराशा जताते हुए कहा कि वायु प्रदूषण जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है और इस पर जागरूकता फैलाने के प्रयासों का स्वागत होना चाहिए।

मेयर रितु तावड़े ने दीया मिर्जा पर लगाए आरोप

बीएमसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मेयर रितु तावड़े ने कहा कि हिंदू अपनी परंपराओं और त्योहारों को मनाने का तरीका अच्छी तरह जानते हैं। उन्होंने अभिनेत्री पर चुनिंदा एजेंडे के तहत काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनका रुख हिंदुत्व के प्रति विरोध का रहा है। तावड़े के मुताबिक, इसी वजह से उन्होंने दीया मिर्जा के वीडियो का विरोध किया। मेयर ने अभिनेत्री के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने नर्मदा परियोजना, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयानों का भी विरोध किया है। तावड़े ने यह भी कहा कि बीएमसी को अपने अभियानों में किसी व्यक्ति को शामिल करने से पहले मेयर कार्यालय की मंजूरी लेनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दीया मिर्जा अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी राय रखने के लिए स्वतंत्र हैं।

दीया मिर्जा ने कहा- जनहित में बनाया था वीडियो

बीएमसी के सोशल मीडिया पेज से वीडियो हटाए जाने के बाद दीया मिर्जा ने अपनी प्रतिक्रिया दी। अभिनेत्री ने कहा कि उन्होंने इस अभियान के लिए बीएमसी से कोई फीस नहीं ली थी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में निराशा जताते हुए लिखा कि उन्होंने जनहित में यह वीडियो बनाया था, फिर इसकी आलोचना क्यों की जा रही है? उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण चिंता का विषय है और इसे कम करने के लिए किए जाने वाले सभी प्रयासों का स्वागत होना चाहिए। दीया ने यह भी कहा कि वीडियो बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत जनहित में तैयार किया गया था। अभियान में उन्होंने लोगों से दिवाली के दौरान शोर और वायु प्रदूषण से बचने की अपील की थी।

अमित साटम की आपत्ति के बाद हटाया गया वीडियो

दरअसल, बीएमसी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर दीया मिर्जा का एक वीडियो साझा किया था। इसमें अभिनेत्री लोगों से दिवाली पर पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने और प्रदूषण कम करने की अपील कर रही थीं। मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने रविवार को इस वीडियो पर आपत्ति जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया और बीएमसी को टैग किया। साटम ने कहा था कि दिवाली मनाने का तरीका सिखाने के लिए दीया मिर्जा की जरूरत नहीं है। उन्होंने हिंदू परंपराओं को संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताते हुए वीडियो पर सवाल उठाए। इसके बाद बीएमसी प्रशासन ने वीडियो को अपने सोशल मीडिया पेज से हटा दिया। हालांकि, बीएमसी के अकाउंट पर अभिनेत्री माधुरी दीक्षित, निशिगंधा वाड और क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे के अभियान से जुड़े वीडियो मौजूद हैं।

नितेश राणे और रामदास अठावले ने भी उठाए सवाल

इस विवाद में महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले भी शामिल हो गए हैं। राणे ने सवाल उठाया कि पर्यावरण प्रदूषण को लेकर चिंता केवल दिवाली और होली जैसे हिंदू त्योहारों के दौरान ही क्यों जताई जाती है। उन्होंने मुहर्रम और ईद जैसे मौकों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हिंदू त्योहारों को निशाना बनाया जाता है। वहीं, रामदास अठावले ने कहा कि पटाखों के बिना दिवाली का उत्सव अपना महत्व खो देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि प्रदूषण नहीं होना चाहिए। अठावले के मुताबिक, दीया मिर्जा की ओर से इस तरह की अपील करना हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।

पर्यावरण बनाम धार्मिक परंपराओं पर छिड़ी बहस

दीया मिर्जा के वीडियो को हटाए जाने के बाद विवाद अब केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ पर्यावरण संरक्षण और वायु प्रदूषण कम करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ कुछ नेताओं ने इसे धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप बताते हुए विरोध जताया है। इस घटनाक्रम ने त्योहारों के दौरान प्रदूषण नियंत्रण और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

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